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आचार्य श्री : इंदौर दैनिक खबरें

108 स्वर्ण व 1243 रजत शिलाएं स्थापित (12/03/2020)

इंदौर। आचार्य विद्यासागर महाराज के सान्निध्य में बुधवार को रेवतीरेंज स्थित प्रतिभा स्थली पर पीले पत्थर से बनने वाले दो जिनालयों का शिलान्यास समारोह आयोजित हुआ। इसमें एक जिनालय की ऊंचाई 225 फीट तो दूसरे की 125 फीट रहेगी। इनमें स्थापित होने वाली प्रतिमाओं के लिए 108 स्वर्ण और 1243 रजत सहित 1351 शिलाएं स्थापित की गईं।

इस अवसर पर आचार्यश्री ने प्रतिभा स्थली को नया नाम तीर्थोदय धाम दिया। इस मौके पर कर्नाटक से आए श्रद्घालुओं ने आचार्यश्री के नाम से भारत सरकार द्वारा बनाए गए डाक टिकट और स्पेशल कवर का विमोचन किया। शिलान्यास प्रतिष्ठाचार्य सुनील भैया और विनय भैया के मार्गदर्शन में हुआ। प्रतिभा स्थली पर आचार्यश्री के सान्निध्य में 225 फीट ऊंचा सर्वोदभद्र जिनालय और 125 फीट ऊंचा सहस्त्रकूट जिनालय का निर्माण होना है। ये दोनों मंदिर पीले रंग के पाषाण से बनाए जाएंगे। इस तरह के मंदिर की खासियत यह है कि इनकी उम्र हजारों साल की होती है। सुंदरलाल जैन, आजाद कुमार जैन, अशोक डोशी, मनोज बाकलीवाल, मनीष नायक, सिंपल जैन, प्रजेश जैन आदि मौजूद थे।

‘गंध कभी पवन की नहीं, फूलों की होती है’ :

शिलान्यास समारोह में आचार्यश्री ने कहा कि बगीचा बहुत दूर है जहां अनेक प्रकार के फल और फूलों की खुशबू है। अब इस खुशबू को कौन फैला रहा है। इसे फैलाने वाले का नाम गंधवाहक है। उसे कभी थकावट नहीं आती। उसका लक्ष्य सिर्फ यही है कि सबको ये सुगंध पहुंचाता रहूं। इसमें सफल हुआ तो मेरा जीवन सार्थक होगा। गंध कभी भाग नहीं सकती लेकिन इसे पवन लेकर जाता है। गंध कभी पवन की नहीं सिर्फ फूलों की होती है। उसी प्रकार सुगंध लेकर आपके पास आया है।

मुहूर्त में शुभ विवाह होते हैं। इंदौरवासियों ने काफी बार प्रयास किया। हमने कहा कि जब तक कलियां खिलेंगी नहीं तब तक गंधवाहक क्या लेकर जाएगा? हमारा आना सार्थक होगा जब आप कुछ करके दिखाओगे। संजीवनी फल जीवन प्रदान करने वाला है जिससे लक्ष्मण सही हो गए थे। उसी प्रकार आपकी सोई चेतना फिर से चेतक हो, उसके लिए धर्म का अध्ययन करना है।

 


‘कर्मों को तप-साधना से कर सकते हैं समाप्त’ (07/03/2020)

इंदौर। जंगल कितना भी बड़ा हो लेकिन वृक्षों के आपस में संघर्ष से आग लग जाती है तो सब खाक हो जाता है। इसी प्रकार हमारे कर्मों का जंगल अनंतकाल तक फैला हुआ है। इन्हें हम अपने तप-साधना से समाप्त कर सकते हैं।

यह बात आचार्य विद्यासागर ने रेवतीरेंज स्थित प्रतिभास्थली पर शुक्रवार को कही। वे धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हम जिस प्रकार निर्जन वन में अकेले रहते हैं, ठीक उसी प्रकार मोक्ष के मार्ग पर भी भय, मान, अभिमान से दूर रहना चाहिए। लोग बड़े-बड़े विद्यालय खोलते हैं लेकिन उससे पहले विश्व को समझें, फिर विद्यालय खोलें। भोजन करने में आनंद नहीं, भोजन पचने में आनंद है।

इसी तरह कर्म के उदय में उनसे लड़ने पर पचाने का आनंद आता है। ताली बजाना भी संघर्ष का प्रतीक है। विज्ञान कहता है कि इस संघर्ष से बड़े-बड़े रोग दूर हो जाते हैं। दूसरों को तोड़ने में नहीं बल्कि स्वयं के कर्मों के टूटने में वास्तिविक विजय है।

दयोदय ट्रस्ट के महामंत्री अशोक डोसी और कोषाध्यक्ष कमल अग्रवाल ने बताया कि आहार करने का सौभाग्य दिनेश सोगानी परिवार को मिला। प्रदीपकुमार जैन ने पादप्रक्षालन किया।

  • 8 से 10 मार्च तक विशेष प्रवचन होंगे।
  • रविवार को दोपहर 2 बजे प्रवचन होंगे
  • महाराजश्री ने रेवती रेंज की गोशाला पहुंचे, व्यवस्थाओं को देखकर प्रसन्न हुए

Source : Naidunia


 

विज्ञान नहीं बता सकता, हमारी पाठाशाला से मिलेगा स्वप्न आने का कारण (06/03/2020)

इंदौर। हमारी पाठशाला से आपको स्वप्न आने का कारण मिल सकेगा, जबकि किसी भी विज्ञान से ऐसी जानकारी नहीं मिलेगी। जैसे हम यहां प्रत्येक वस्तु को जान लेते हैं, वैसे ही स्वप्न के बारे मे जान लेते हैं। विज्ञान को इसका ज्ञान है, लेकिन वह अर्थ नहीं निकाल पाता। रेवती रेंज सांवेर रोड पर गुरुवार को आचार्यश्री विद्यासागरजी ने प्रवचन में उक्त बात कही।

आचार्यश्री ने कहा कि अनेक व्यक्ति अपने विचार और निर्देशन के माध्यम से धारणा बना लेते हैं किंतु सही दिशा में पुरुषार्थ होना जरूरी है। उसी प्रकार आत्मा के विषय में चिंतन जारी है। आत्मा का स्वभाव ही चिंतन होता है। इसे शिक्षित व अशिक्षित दोनों करते हैं। हर व्यक्त उत्तर दे सकता है, चाहे वह अनपढ़ ही क्यों न हो। विज्ञान की परिभाषा को पाया, सुना नहीं फिर भी वो आपके सवाल का जवाब देते हैं।

विश्व में ऐसा कोई विद्यालय नहीं है जो स्वप्न का कारण बता सके, सिर्फ हमारी पाठाशाला में ही इसका जवाब मिलता है। विज्ञान को घमंड नहीं सरल होना चाहिए। पशुओं का भी सम्यक दर्शन होता है। विश्वविद्यालय खोलने की योजना बनाने वालों को पहले वर्तमान विश्व को समझ लेना चाहिए। ट्रस्ट परिवार की महिला प्रमुखों ने आचार्यश्री का पूजन किया। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य डॉ. निलेंद्र जैन और प्रदीप प्रियांश जैन, महापूजन का सौभाग्य महिला मंडल व ब्रह्मचारी बहनों तथा आहार का सौभाग्य सुधीर समीर जैन परिवार को मिला।

Source : Patrika


आप प्रतिभा स्थली के सेवक बने हैं, मालिक नहीं : आचार्यश्री (05/03/2020)

सहज रूप से जब हम ज्ञान को पा लेते हैं उस समय अलग अनुभव रहता है। आप सभी को अवसर प्राप्त हो गया है। सबके दिमाग में अभी तक यह था कि हम यहां के ट्रस्टी हैं, लेकिन आप कोई ट्रस्टी नहीं सेवक हैं। आप जब शब्द के अर्थ के ज्ञान को पहचान जाएंगे, तब आप को ज्ञात होगा कि ट्रस्टी और सेवक का क्या अर्थ होता है।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने बुधवार को सांवेर रोड स्थित रेवती रेंज में निर्मित हो रही प्रतिभा स्थली पर पहले दिन प्रवचन में कही। उन्होंने कहा कि सब लोग भ्रम में हैं वो सब कुछ हैं। सेवक बनकर रहने में ही आपको आनंद आएगा। आपको किसी प्रकार का अभिमान नहीं रखना है। समर्पण से इस काम को करना है। ब्रह्मचारी सुनील भैया ने बताया प्रतिभा स्थली में पहले दिन आहार का लाभ प्रतिभा स्थली की दीदियों को मिला।

Source : Bhaskar


‘धनवान की तृष्णा खत्म नहीं होती’ (04/03/2020)

इंदौर। धन का अभाव निर्धन के दुख का कारण है जबकि धनवान अपनी तृष्णा से परेशान है। धनवान की तृष्णा कभी समाप्त नहीं होती है। इसी का नाम पंचमकाल है। धन के अभाव में दुखी को हम रास्ता बता सकते हैं। उपवास और एकासन से ही तप नहीं होता। इच्छाओं का विरोध करना ही मुख्य तप कहलाता है।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने मंगलवार को दिगंबर जैन मंदिर क्लर्क कॉलोनी में धर्मसभा में कही। उनकी अगवानी में घर-घर में वंदनवार सजाए गए थे। प्रचार प्रमुख प्रवीण जैन ने बताया कि पहले भगवान का अभिषेक एवं शांतिधारा हुई। इसके बाद आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य गोधा परिवार को मिला। इस अवसर पर आनंद गोधा, नवीन गोधा, रमेश जैन, एमके जैन, डीके जैन, शरद शास्त्री, मनीष जैन, अक्षय कासलीवाल, आनंद जैन उपस्थित थे।

51 फीट के कीर्ति स्तंभ का उद्‌घाटन, पहुंचे रेवती रेंज :
ब्रह्मचारी सुनील भैया और मीडिया प्रभारी राहुल सेठी ने बताया कि आचार्यश्री ससंघ विहार कर परदेशीपुरा स्थित रेडीमेड कॉम्पलेक्स से चंद्रगुप्त चौराहा स्थित कीर्तिस्तंभ पहुंचे।वहां 51 फीट के स्तंभ का उद्‌घाटन किया। इसे राजस्थान के जैसलमेरी पत्थर से बनाया गया। यहां से रेवती रेंज स्थित प्रतिभा स्थली पहुंचे।

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नगर के कई मंदिरों में पहुंचे आचार्य विद्यासागर (03/03/2020)


इंदौर। आचार्य विद्यासागर महाराज सोमवार को नगर के कई मंदिरों में पहुंचे। उनकी जगह-जगह मंगल अगवानी की गई। वे सुबह उदासीन आश्रम जैन मंदिर से विहार कर मल्हारगंज स्थित रामाशाह मंदिर गए। इसके बाद चंदाप्रभु चैत्यालय, इतवारिया बाजार कांच मंदिर, शक्कर बाजार होते हुए राजवाड़ा स्थित माणक चौक मंदिर पर पहुंचे। दोपहर में विहारकर परदेशीपुरा स्थित दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। क्लर्क कॉलोनी स्थित प्रगति स्कूल में रात्रि विश्राम के लिए गए। मंगलवार सुबह मांगलिक क्रिया क्लर्क कॉलोनी में होगी।

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आत्म तत्व को जानना आवश्यक : विद्यासागर (02/03/2020)

इंदौर। एक हिरण जंगल-जंगल भटक रहता है। खुशबू उसकी नाभि से ही आती है लेकिन वह समझ नहीं पाता। वह बाहर खुशबू को खोजता रहता है। हम सब सांसारिक प्राणी भी उसी तरह हैं। हमें अपने जीवन का उद्देश्य समझना जरूरी है। आत्म तत्व को जानना आवश्यक है।

यह बात आचार्य विद्यासागर ने उदासीन आश्रम में प्रवचन के दौरान रविवार को कही। रविवार को जावरा वाला मंदिर की पाठशाला के बच्चों ने आचार्यश्री को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। धर्मसभा का संचालन ब्रह्मचारी सुनील भैया ने किया। दयोदय ट्रस्ट के सुनील जैन व सुधीर बिलाला ने बताया कि आचार्यश्री के आहारदान का सौभाग्य राजेंद्र जैन परिवार को मिला।

ट्रस्ट के अध्यक्ष सुंदरलाल जैन व कोषाध्यक्ष कमल अग्रवाल ने बताया कि प्रतिभा स्थली के आचार्यश्री के पहुंचने से पहले वहां पर निर्माण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

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‘सूर्य की दो लालिमा, फिर भी दोनों में अंतर’ (01/03/2020)

इंदौर। जीवन में व्यक्ति को प्रतीक्षा प्रभात की करनी चाहिए। प्रभात के समय लालिमा होती है। सूर्यको देख नहीं सकते हैं, लेकिन उसकी लालिमा को देख सकते हैं। लालिमा तो सूर्य के अस्त होने के समय भी रहती है, इसलिए कहा जाता है कि सूर्य के उदय और अस्त में लालिमा होती है। फिर भी दोनों लालिमा में अंतर है। एक दिन की शुरुआत तो एक अंत की लालिमा है। ध्यान रखना समवशरण हर जगह नहीं मिलता है।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने शनिवार को धर्मसभा में कही। वे कंचनबाग स्थित समवशरण मंदिर में आयोजित धर्मसभा में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि समवशरण का कोई मालिक नहीं होता है। यहां तक कि दिव्य ध्वनि का आपको स्वयं अहसास होगा, इसलिए कहते हैं कि डूबते हुए सूर्य की पूजा नहीं करते हैं। हम भारतीय संस्कृति के हैं। इसमें डूबते सूर्य की लालिमा का महत्व नहीं है। हमें यहां लगभग दो माह हो गए हैं। यहां की जनता वर्षों से प्रतीक्षा कर रही थी। हमारा कहना है कि हमारी प्रतीक्षा करोगे तो कार्य नहीं होगा।

ब्रह्मचारी सुनील भैया और दयोदय ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष कमल अग्रवाल ने बताया कि इसरो के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और चंद्रयान-2 में शामिल डॉ. राजमल जैन ने आचार्य और पूरे संघ के दर्शनकिए। डॉ. राजमल जैन ने समाजजन से कहा कि इस समय पूरी दुनिया सौर ऊर्जा की दिशा में काम कर रही है। चंद्रयान-2 का लक्ष्य यही था कि वहां की रोशनी का उपयोग बिजली बनाने में किया जाए। इस दौरान अशोक डोशी, मनोज-मुकेश बाकलीवाल, सुधीर बिलाला मौजूद थे।

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बच्चों की पहली पाठशाला घर में मिले संस्कार से शुरू होती है : विद्यासागरजी (29/02/2020)

बच्चों की पहली पाठशाला उसके घर के संस्कार से शुरू होती है। जीवन में संस्कार की पाठशाला कहां से शुरू होती है, एक मां बच्चे को लेकर मंदिर में आती है। पाठशाला शुरू हो जाती है। नमोस्तु करती है और बच्चे को अर्थ बताती है कि नमोस्तु का अर्थ धोक देना होता है। बच्चा देखता रहता है कि मां नमोकार की माला फेरती रहती है। माला पूर्ण होने के बाद जब मां उठी तो बेटा भी उठ गया। इसे कहते हैं पाठशाला। संस्कार इसे कहा जाता है कि जैसा आप करेंगे वो बच्चे करेंगे।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने शुक्रवार को एमजी रोड स्थित उदासीन आश्रम में अपने प्रवचन में कही। सैटेलाइट कॉलोनी, कनाड़िया और राजबाड़ा समाज द्वारा श्रीफल भेंट किए गए। इंदौर जेल अधीक्षक राजेश बघरा ने श्रीफल अर्पित किया। महापूजन जावरा वाला मंदिर के महिला मंडल ने किया।

दो दिनी फेयर में मिलेंगे हथकरघा के कपड़े- ब्रह्मचारी सुनील भैया व कमल अग्रवाल ने बताया बनारस जेल से बनकर आए हथकरघा के वस्त्रों का नाम आचार्यश्री ने अपनापन दिया। हथकरघा के कपड़े इंदौर में शनिवार से लगने वाले दो दिनी कपड़े के फेयर में भी मिलेंगे। प्रदीप गोयल ने बताया आचार्यश्री के सान्निध्य में मासिक पत्रिका सन्मती वाणी का विमोचन किया गया। भक्तों को आशीर्वाद देते आचार्य विद्यासागर महाराज व अन्य संत।

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चीन को भी पता चल गया मांसाहार का दुष्परिणामः आचार्य विद्यासागर (28/02/2020)

इंदौर। व्यक्ति को सोच-समझकर किसी वस्तु का त्याग करना चाहिए। सोच-समझकर त्याग करने से स्थायित्व रहता है। जहां किसी के कहने में त्याग करना पड़ता है तो उसमें धर्म का समावेश नहीं रहता है। ये मनुष्य जीवन है, इसमें परिवर्तन संभव है। हम एक माह से सुन रहे हैं कि चीन कोरोना नामक बीमारी से जूझ रहा है। अब उसे भी मालूम पड़ गया है कि मांसाहार के क्या दुष्परिणाम हैं।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने गुरुवार को कही। वे उदासीन आश्रम एमजी रोड पर आयोजित धर्मसभा में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुना है वहां (चीन) ऐसी बीमारी हो गई है कि लोगों का एक-दूसरे से संपर्क बंद हो गया है। अब तो ऐसालगता है कि उस देश का खंडन हो गया है।

वहां अपने ही लोग एक-दूसरे से नहीं मिल पा रहे हैं। इसका कारण मांसाहार ही है। चीन ने अब घोषणा कर दी है कि कोई भी
व्यक्ति मांसाहार का भक्षण नहीं करेगा। आखिरकार बीमारी के भय के कारण उसने शाकाहार का मार्ग अपना लिया है। अब वहां भी अहिंसा का सूर्य उदय हो रहा है। इस अवसर पर आचार्य को भगवान महावीर की जयंती के जुलूस में शामिल होने के लिए श्रीफल भेंट किया गया। इस दौरान अध्यक्ष नरेंद्र वेद, महामंत्री सुयश जैन, नकुल पाटोदी मौजूद थे। ब्रह्मचारी सुनील भैया ने बताया कि अचार्य के आगामी दिनों में हाई कोर्ट परिसर, एसपी ऑफिस और राजवाड़ा पर प्रवचन होंगे।

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‘भगवान से पूछो- वे आप से क्यों नहीं बोलते’ : आचार्य विद्यासागर (27/02/2020)

इंदौर। आप भगवान से क्यों नहीं पूछते कि वह आप से क्यों नहीं बोलते। भगवान उन्हीं से बोलते हैं जो उनकी भाषा को समझते हैं। आप लोग विदेशी भाषा सीख कर आए हो, इसलिए भगवान नहीं बोलते हैं। आप उनके यहां की भाषा बोलना प्रारंभ कर दो तो अवश्य आपसे भगवान बोलेंगे।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने बुधवार को उदासीन आश्रम एमजी रोड पर कही। धर्मसभा में उन्होंने कहा कि मानव जीवन का ऐसा उपयोग करो कि भगवान हमसे प्रसन्न हो जाएं। ब्रह्मचारी सुनील भैया व दयोदय ट्रस्ट के महामंत्री अशोक डोशी ने बताया कि बुधवार को आचार्यश्री और संघ के अनेक संतों ने क्षेत्र के मंदिरों के दर्शन किए। इनमें प्रमुख रूप से उदासीन आश्रम मंदिर, कल्याण भवन स्थित मंदिर के साथ अनूप भवन स्थित मंदिर के दर्शन किए।

मुंबई से आए भक्तों ने आचार्य को कमंडल भेंट किए थे। समाजसेवी अतुल पाटोदी, प्रतीक जैन ने श्रीफल अर्पित किया। प्रतिदिन यहां शाम को गुरुभक्ति के समय आचार्य के साथ ही सभी संतों के दर्शन एक साथ हो रहे हैं। आहार का सौभाग्य दिनेश जैन परिवार को मिला।

Source : Naidunia


दो माह बाद भी सब स्वप्न जैसा लग रहा : आचार्यश्री (26/02/2020)

इंदौर। इंदौर प्रवास को दो महीने बीतने को हैं, यह सब एक स्वप्न जैसा लग रहा है, क्योंकि एक स्थान पर इतना प्रवास नहीं हो पाता है। कुछ नगर ऐसे बन जाते हैं, जो व्यक्ति को घुमा देते हैं। समवशरण में भी 12 सभाएं लगती हैं, लेकिन वह घुमावदार नहीं लगता है। यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने मंगलवार को उदासीन आश्रम एमजी रोड पर कही।

आचार्य विद्यासागर शहर में 5 जनवरी को हुए मंगल प्रवेश के बाद से अब तक के अपने अनुभव धर्मसभा में समाजजन के साथ साझा कर रहे थे। ब्रह्मचारी सुनील भैया और कमल अग्रवाल ने बताया कि आचार्य के आहार का सौभाग्य सुंदरलाल बीडीवाले परिवार को मिला। पाद प्रक्षालन रानी अशोक डोशी, अर्पित पाटोदी परिवार ने किया।

महापूजन का अवसर कंचनबाग, साउथ तुकोगंज समाज की महिला मंडल को मिला। दयोदय ट्रस्ट द्वारा प्रतिभा स्थली के कार्यों की जानकारी दी गई।

आचार्य ने 52 दिनों में शहरवासियों को दी ये सात प्रमुख सीख

संस्कारित बनें : एक बार माता-पिता संत के चरणों में अपने पुत्र को लेकर आए और बोले कि ये सुनता नहीं है, तो संत ने पूछा क्यों ये बहरा है क्या? तो उन्होंने कहा नहीं-नहीं, बहरा नहीं है। सुनता नहीं है मतलब, अब तो हमें भी सुना देता है। इस पर संत ने कहा कि यह संस्कारों के अभाव के कारण हो रहा है। आने वाली पीढ़ी को संस्कारित करें।

मातृभाषा का उपयोग करें : भारतीय भाषा जो हमारी मातृभाषा है, उस भाषा में ही शिक्षा होगी, तब ही हम तरक्की कर पाएंगे, विदेशी भाषा में नहीं। आज न्यायालय में निर्णय तो सुनाया जाता है, लेकिन सामने वाले की भाषा में नहीं, विदेशी भाषा में दिया जाता है।

युक्ति का इस्तेमाल करें : कई लोगों की आदत होती है कि उन्हें अच्छी चीज दे दें तो भी उसका सही उपयोग नहीं कर पाते हैं। आपको उस वस्तु का पूर्ण लाभ मिले, इसके लिए युक्ति अपनानी पड़ती है।

अभ्यास से आती है समझ : सांसारिक प्राणी को संसार की बातों में ही रस आता है। धर्म-अध्यात्म में मन कम ही लगता है। धीरे-धीरे अभ्यास से जब वास्तविकता समझ में आती है तो ग्रंथों में कही गई बातें गहरी उतर जाती हैं।

जीवन का उचित उपयोग करें : हम ईश्वर की मौलिक रचना हैं। हमें इस मौलिक रचना की वास्तविक कीमत ज्ञात होती है तो हम पश्चाताप करते रह जाते हैं। इस जीवन का उचित उपयोग करना ही हमारा लक्ष्य होना चाहिए।

एकजुट होकर बेजोड़ बनें: सम्यक दर्शन के माध्यम से हम अपने आपको विकास ही नहीं करते हैं, बल्कि उससे दूसरे के विकास का वातावरण भी निर्मित करते हैं। हम एकजुट होकर बेजोड़ बनें। एकजुट होने का प्रमाण ही है कि भारत को आज विश्व गुरु कहा जा रहा है।

तप साधना से सोए भाग्य को जगाएं : अधिकांश लोग इस शरीर को सांसारिक भोगों में ही खर्च कर रहे हैं। तप साधना के जरिये अपने सोए भाग्य को जाग्रत करें। जो व्यक्ति शरीर को तपाता है, उससे बढ़कर रईस कोई दूसरा नहीं है। आत्मा तत्व को पाने वाला ही तीन लोकों का नाथ बन सकता है।

Source : Naidunia 

प्रवचन वीडियो

2023 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार अंतरिक्ष पार्श्वनाथ (शिरपूर) से यहां होना चाहिए :




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