दीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचनआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की याद में भोपाल में बनेगा स्मारकदुनिया को विद्यासागरजी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिएः भागवतसंत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलिआचार्यश्री को भावांजलिआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधि लीअष्टान्हिका पर्व का महत्वसाधु जीवन दर्शन

तुम विद्यासागर हो

तुम विद्यासागर हो


तुम विद्यासागर हो, तुम गुरु ज्ञान दिवाकर हो।
तप संयम धारी हो, गुरु तीर्थ बिहारी हो॥

चंदा-सूरज, तारे, नभ में दिखते सारे।
मुस्कान तुम्हारी पा, बाँटे खुशियाँ न्यारे॥
तुम बीतरागी गुरु हो, सबके हितकारी हो॥।

श्रद्धा-भक्ति तुमसे, जीवन ज्योति रोशन।
कलयुग की अमाँ हुई, गुरु चरणों से रोशन॥
आगम चर्याधर हो, चारित्र शिरोमणि हो॥।

समता रस अनुरागी, मिथ्या प्रपंच त्यागी।
तुम ज्ञान-ध्यान धारी, मद-मत्सर परिहारी॥
गुरु जीवित मंत्र यहाँ, चैतन्य विहारी हो॥

रचयिता – ऐलक : निःशंकसागरजी

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