दीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचनआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की याद में भोपाल में बनेगा स्मारकदुनिया को विद्यासागरजी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिएः भागवतसंत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलिआचार्यश्री को भावांजलिआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधि लीअष्टान्हिका पर्व का महत्वसाधु जीवन दर्शन

सामयिक चिनंतवन

हे आत्मन ! तुम शास्वत रत्नत्रय निधि के स्वामी हो |
अनंत सूख शांति संतोष के भंडार हो | अपनी निधि को धर्म पुरुषार्थ के बाल पर प्राप्त करो |

हे आत्मन ! तुम शिद्ध के समान शुद्ध हो, चैतन्य के पुंज हो, अनंत शक्ति के धनी हो, तुम सबको जानने, देखने वाले स्वयं दुनिया के सुंदरतम पदार्थ हो | तुम स्वयं सुंदर हो, जिसका कोई रूप नहीं, ऐसे अरुपी अमुर्तिक हो, अपने सुंदर रूप को टटोलो, खोजों, जरूर दर्शन पोगाई, पा गए तो तुम तृप्त हो जाओगे |

हे आत्मन ! जिसे तुम बाहर देख रहे हो, वह जड़ है, नश्वर हे, देखने वाले तुम तो अपने अन्दर छिपे हुए हो |
अपने को अपने से अभिन्न चिदानन्द प्रभु को निहारो |

हे मुक्ति पाठ के राही | बाहर तुम किसकी आवाज़ सुनना चाह रहे हो | कारण पिएँ संगीत की? क्या यही कारणों का सौंदर्य है ? नहीं नहीं – तुम्हें अंतरात्मा पुकार रही है, उसकी मधुरम , क्रमक्षयकारिणि, सुंदर आत्मानंद दायिनी, सहजानंद दायिनी आवाज़ को सुनो |

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