दीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचनआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की याद में भोपाल में बनेगा स्मारकदुनिया को विद्यासागरजी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिएः भागवतसंत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलिआचार्यश्री को भावांजलिआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधि लीअष्टान्हिका पर्व का महत्वसाधु जीवन दर्शन

प्रार्थना

हे प्रभु ! मेरा किसी के भी साथ राग नहीं है. द्वेष नहीं है |
बैर नहीं है. तथा क्रोध, मन, माया लोभ नहीं है, अपितु सर्व जीवों के प्रति उत्तम क्षमा है |
जब तक मोक्षपद की प्राप्ति ना हो तब तक भव-भव में मुझे शास्त्रों के पठन-पाठन का अभ्यास, जिनेंद्र पूजा, निरंतर श्रेष्ठ पुरुषों की संगति, सच्चरित्र संपन्न पुरुषों के गुणों की चर्चा, दूसरों के दोष कहने में मौन, सभी प्रणियों के प्रति प्रिय और हितकारी वचन एवं आत्मकल्याण की भावना (प्रतीत) ये सब वस्तुएँ प्राप्त होती रहें |
है जिनेंद्र ! मुझे जब तक मोक्ष की प्राप्ति न हो तब तक आपके चरण मेरे हृदय में और मेरा ह्रुदय आपके चरणों में लीन रहे |
हे भगवन ! मेरे दुखों का क्षय हो, कर्मों का नाश हो, रत्नत्रय की प्राप्ति हो, शुभगति हो, सम्यग्दर्शन की प्राप्ति हो, समाधिमरण हो और श्री जिनेंद्र के गुणों की प्राप्ति हो, ऐसी मेरी भावना है, ऐसी मेरी भावना है, ऐसी मेरी भावना है |

“प्रभु चरणों में शत-शत नमन”

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