दीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचनआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की याद में भोपाल में बनेगा स्मारकदुनिया को विद्यासागरजी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिएः भागवतसंत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलिआचार्यश्री को भावांजलिआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधि लीअष्टान्हिका पर्व का महत्वसाधु जीवन दर्शन

थोड़ा सा इधर भी…

– होड़ शालीनता की करो, फिजूलखर्ची की मत करो।

– अपने लाभ के लिए औरों का नुकसान मत करो।

– संकट में साथ देने वाला ही सच्चा मित्र है, बाजार में नमस्कार करने वाला नहीं।

– अहसान मानो पर अहसान मत करो।

– किसी को धोखा मत दो पर धोखेबाज से सावधान रहो।

– आज का काम कल पर मत छोड़ो।

– विनम्रता अच्छी है और अभिमान बुरा है।

– सेवा का धर्म सर्वोपरि है।

– जाति कर्म से बनती है, जन्म से नहीं।

– मानव-धर्म एक है, परंतु जाति धर्म पृथक-पृथक होता है।

– पाप वही है जिसको करने से निंदा होती हो।

– पुण्य वही है जिसको करने से प्रशंसा होती है।

– धर्म संकीर्णता से नहीं बढ़ेगा और पाप पश्चाताप से नहीं बढ़ेगा।

– कीमत हिम्मत की है, कायरता की नहीं।

– आशा ही लक्ष्य की पूर्ति कर सकती है, निराशा नहीं।

– मानव धर्म समझने वाला गृहस्थी संन्यासी से कम नहीं है।

– गृहस्थ संन्यास से भी श्रेष्ठ है।

– जन्म भोग-भोगने के लिए ही होता है।

– मनुष्य के लिए स्वर्ग और नरक दोनों खुले हैं, जहां जाना चाहे, कर्म करके जा सकता है।

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