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जैन समाज की धार्मिक पंरपरा सल्लेखना पर रोक हटी

सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम फैसला

नयी दिल्ली, 31 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने आज दूरगामी परिणाम वाले एक महत्वपूर्ण फैसले में जैन समुदाय की धार्मिक परंपरा सल्लेखना (प्रचलित धारणा यानी मृत्यु पर्यंत उपवास) पर राजस्थान हाइकोर्ट द्वारा लगायी गयी रोक संबंधी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, यानी अब इस मामले के अंतिम निर्णय आने तक जैन समुदाय अपनी इस धर्मिक पंरंपरा का निर्वाह कर सकेगा, यह परंपरा वैधानिक होगी। साथ ही इस संबंध में सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर समूचे जैन समाज, साधु, संतों ने संतोष व राहत व्यक्त की है और कहा है कि प्रसन्नता की बात है कि माननीय न्यायालय ने उनकी धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को बहाल रखा है। वे अपनी धार्मिक परंपरा का पालन कर सकेंगे जो अनादि काल से चली आ रही है तथा जिसके ऐतिहासिक प्रमाणिक साक्ष्य है।

उन्होंने कहा है कि इसकी तुलना आत्महत्या से कतई नहीं की जा सकती है, यह आत्म साधना का उत्कर्ष है, जिसमें केवल अन्न-जल का ही त्याग नहीं किया जाता है अपितु तमाम तरह के कषाय, मायामोह, क्रोध, ईर्ष्या आदि का त्याग कर आत्मा की शुद्धता पाने की साधना की जाती है।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान हाइकोर्ट ने गत 10 अगस्त को अपने फैसले में इस परंपरा को आत्महत्या जैसा बताते हुए उसे भारतीय दंड संहिता की धारा 306 एवं 309 के तहत दंडनीय बताया था। इस फैसले से समूचे जैन समाज में बहुत चिंता तथा बैचेनी व्याप्त हो गई थी। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा संथारा पर प्रतिबन्ध लगा दिये जाने के बाद न केवल समस्त भारत में बल्कि विदेशों में भी जैन समाज द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था। इस फैसले के खिलाफ दिगंबर जैन परिषद ने उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।

(शोभना जैन, अनुपमा जैन, वीएनआई)

Date: 31/08/2015 Time: 15:23:12 PM

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