दीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचनआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की याद में भोपाल में बनेगा स्मारकदुनिया को विद्यासागरजी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिएः भागवतसंत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलिआचार्यश्री को भावांजलिआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधि लीअष्टान्हिका पर्व का महत्वसाधु जीवन दर्शन

तीर्थंकर वंदना

आरती संग्रह


तीर्थंकर वंदना

कभी वीर बन के, महावीर बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना ॥टेक॥
तुम ऋषभ रूप में आना, तुम अजित रूप में आना।
संभवनाथ बन के, अभिनंदन बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥
तुम सुमति रूप में आना, तुम पद्‍म रूप में आना।
सुपार्श्वनाथ बन के, चंदा प्रभु बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥
तुम पुष्पदंत रूप में आना, तुम शीतल रूप में आना।
श्रेयांसनाथ बन के, वासुपूज्य बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥
तुम विमल रूप में आना, तुम अनंत रूप में आना।
धरमनाथ बन के, शांतिनाथ बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥
तुम कुंथु रूप में आना, तुम अरह रूप में आना।
मल्लिनाथ बन के, मुनि सुव्रत बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥
तुम नमि रूप में आना, तुम नेमि रूप में आना।
पार्श्वनाथ बन के, महावीर बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥
कभी वीर बन के, महावीर बन के चले आना, दरश मोहे दे जाना॥

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