Corel Painter Free[Activated] [Final] [Final] UnlimitedThey're sleek, efficient tools designed to assist you obtainI Want Your Sex 2026 WEB-DL AVC Extended Multi-Audio QxR MagnetThe Sinking City 2 Cracked ElAmigos Release Torrent 2026Office 2025 ARM64 Fully Activated from Microsoft Insider [QxR] Pre-Activated CommandMutiny 2026 1080p Magnet0x7e8ce77cदीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचन

जिन दर्शन

जिनदर्शन

मुनि श्री 108 क्षमासागर जी

आइए जिनदर्शन के लिए मंदिर चलें। पहले नहा-धो लें। साफ-सुथरे और सादे कपड़े पहन लें। असल में पवित्रता, सादगी और सीधापन, मंदिर में जाने से पहले कुछ हद तक हममें आ जाना चाहिए। दर्शन तभी संभव है। मंदिर पहुँचने से पहले रास्ते में कोई और काम हम न करें। निष्काम होने निकले हैं, तो सब कामों से मुक्त होना जरूरी है। सारा रास्ता भगवान के दर्शन की प्यास के साथ गुजरे, उनके गीत गाते हुए गुजरे। ऐसा लगे मानो आज हम अपने किसी अत्यंत प्रिय अभिन्न सखा से मिलने जा रहे हैं। अपना सबकुछ समर्पित करने जा रहे हैं। हाथ श्रेष्ठ चावलों से भरे हैं और हृदय गहरे समर्पण से भरा है। मंदिर के द्वार पर पहुँच कर हम पहले पैर धो लें, मन का व्यर्थ बोझ उतार कर रख दें, और अनुभव करें कि अनाहत गूँजती दिव्य ध्वनि से व्याप्त श्री भगवान के समवसरण में प्रवेश के क्षण आ गए हैं। बाहर दालान में लगे घंटे की धीमी-धीमी ध्वनि सुनकर मन शांत पवित्र हो गया है। मानो बाहर का सारा कोलाहल यहीं छूट गया है। अब तो प्राणों में एक ही आवाज गूँज रही है- ओम्‌ जय जय जय, नमोऽस्तु नमोऽस्तु नमोऽस्तु……

रोम-रोम आनंद से भरकर सिहर उठा है। श्री भगवान को सम्मुख पाकर हम श्रद्धा से झुकते चले जा रहे हैं। जमीन से माथा टेक कर हम पहला प्रणाम निवेदित करें। फिर संभलकर खड़े होकर श्री भगवान्‌ की वीतराग छवि को अपलक देखते-देखते एकतान होकर अंतस्‌ वीणा पर जो स्वर गूँजे उन्हें ही शब्दों का रूप देते चले जाएँ। वाणी से अपने आप भगवान का स्तवन फूट पड़े। हम पुनः उनके श्री चरणों में माथा टेक कर अहं को विसर्जित करने के लिए दूसरा प्रणाम निवेदित करें। अपने साथ लाए चावलों से भरी अँजुलि खोलकर अपना सर्वस्व समर्पित कर दें। ये चावल प्रतीक है कि हमारा जीवन भी इन्हीं की तरह उज्ज्वल, अखंड और आवरण से रहित हो सके, हम जन्म मरण से मुक्त हो सकें। अब पुनः संभलकर हम नौ बार णमोकार मंत्र का जाप करें और भगवान के चरणों में झुककर तीसरा प्रणाम निवेदित करें।

दर्शन की यह समग्र प्रक्रिया भावात्मक हो। शेष वेदिकाओं पर भी ऐसे ही तीन भावात्मक प्रणाम निवेदित करें। यथासंभव, हर वेदिका पर कम-से-कम मन-वचन-काय तीनों को प्रभुमय करते हुए उनके गुणों की प्राप्ति के लिए एक प्रणाम-जरूर निवेदित करें। मानिए, जिन-दर्शन हमारी समग्र चेतना को रूपांतरित करने का अनोखा रसायन है। भाव-दशा को निर्मल बनाने का कीमिया है।

3 Comments

Click here to post a comment
  • AADARNIYA,
    SADAR PRANAM & JAY JINENDRA

    jesa ki aap ne devdarshan ke baare bataya wo thik to hai, lekin kya itna karlene se hi devdarshan ho jate he. aapse anurodh hai ki aap devdarshan ke baare me vistar se samjhaye.

प्रवचन वीडियो