योगसागर जी महाराज (ससंघ) के गोटेगांव पहुंचने की संभावना है।मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज के सनावद (मप्र) पहुंचने की संभावना आचार्यश्री की जानकारी अब Facebook पर Youtube - आचार्यश्री विद्यासागरजी के प्रवचन देखिए Youtube पर आचार्यश्री के वॉलपेपर Android पर शाकाहारी रेस्टोरेंट Android पर दिगंबर जैन टेम्पल/धर्मशाला Android पर देश और विदेश के जैन मंदिरों एवं जिनालय की जानकारी के लिए www.jaintemple.in विजिट करें Apple Store - शाकाहारी रेस्टोरेंट आईफोन/आईपैड पर Apple Store - जैन टेम्पल आईफोन/आईपैड पर

प्रवचन : इंडिया नहीं है भारत की गौरव गाथा : आचार्यश्री विद्यासागरजी

14 दिसंबर 2015। रहली (जिला सागर मध्यप्रदेश) में पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतिम दिवस पर गजरथ यात्रा के बाद चारों दिशाओं से भक्तिवश पधारे लगभग 1 लाख जैन-अजैन श्रद्धालुओं को उद्बोधन देते हुए योगीश्व कन्नड़ भाषी संत विद्यासागरजी ने धर्म-देशना की अपेक्षा राष्ट्र और समाज में आए भटकाव का स्मरण कराते हुए कहा कि आज जवान पीढ़ी का खून सोया हुआ है। कविता ऐसी लिखो कि रक्त में संचार आ जाए। उसका इरादा ‘इंडिया’ नहीं ‘भारत’ के लिए बदल जाए। वह पहले भारत को याद रखे। भारत याद रहेगा, तो धर्म-परंपरा याद रहेगी। पूर्वजों ने भारत के भविष्य के लिए क्या सोचा होगा?

उन्होंने इतिहास के मंत्र को सौंप दिया। उनकी भावना भावी पीढ़ी को लाभान्वित करने की रही थी। वे भारत के गौरव, धरोहर और परंपरा को अक्षुण्ण चाहते थे। धर्म की परंपरा बहुत बड़ी मानी जाती है। इसे बच्चों को समझाना है। आज जिंदगी जा रही है। साधना करो। साधना अभिशाप को भगवान बना देती है, जो हमारी धरोहर है जिसे हम गिरने नहीं देंगे। महाराणा प्रताप ने अपने प्राणों को न्योछावर कर दिया। उनके और उन जैसों के स्वाभिमान बल पर हम आज हैं।

भारत को स्वतंत्र हुए 70 वर्ष हो गए हैं। स्वतंत्र का अर्थ होता है- ‘स्व और तंत्र’। तंत्र आत्मा का होना चाहिए। आज हम, हमारा राष्ट्र एक-एक पाई के लिए परतंत्र हो चुका है। हम हाथ किसी के आगे नहीं पसारें। महाराणा प्रताप को देखो, उन जैसा स्वाभिमान बनना चाहिए। उनसे है भारत की गौरव गाथा। आज हमारे भारत की पूछ नहीं हो रही है? मैं अपना खजाना आप लोगों के सामने रख रहा हूं। आप लोगों में मुस्कान देख रहा हूं। मैं भी मुस्करा रहा हूं।

उन्होंने कहा कि हमें बता दो, भारत का नाम ‘इंडिया’ किसने रखा? भारत का नाम ‘इंडिया’ क्यों रखा गया? भारत ‘इंडिया’ क्यों बन गया? क्या भारत का अनुवाद ‘इंडिया’ है? इंडियन का अर्थ क्या है? है कोई व्यक्ति जो इस बारे में बता सके? हम भारतीय हैं, ऐसा हम स्वाभिमान के साथ कहते नहीं हैं अपितु गौरव के साथ कहते हैं, ‘वी आर इंडियन’। कहना चाहिए- ‘वी आर भारतीय’।

उन्होंने कहा कि भारत का कोई अनुवाद नहीं होता। प्राचीन समय में ‘इंडिया’ नहीं कहा जाता था। भारत को भारत के रूप में ही स्वीकार करना चाहिए। युग के आदि में ऋषभनाथ के ज्येष्ठ पुत्र ‘भरत’ के नाम पर भारत नाम पड़ा है। उन्होंने भारत की भूमि को संरक्षित किया है। यह ही आर्यावर्त ‘भारत’ माना गया है जिसे ‘इंडिया’ कहा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि आप हैरान हो जाएंगे, पाठ्यपुस्तकों के कोर्स में ‘इंडियन’ का जो अर्थ लिखा गया है, वह क्यों पढ़ाया जा रहा है? इसका किसी के पास क्या कोई जवाब है? केवल इतना लिखा गया है कि अंग्रेजों ने 250 वर्ष तक हम पर अपना राज्य किया इसलिए हमारे देश ‘भारत’ के लोगों का नाम ‘इंडियन’ का पड़ गया है।

उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक विचार यह करना है कि है कि चीन हमसे भी ज्यादा परतंत्र रहा है। उसे हमसे 2 या 3 साल बाद स्वतंत्रता मिली है। उससे पहले स्वतंत्रता हमें मिली है। चीन को जिस दिन स्वतंत्रता मिली थी, तब के सर्वेसर्वा नेता ने कहा था कि हमें स्वतंत्रता की प्रतीक्षा थी। अब हम स्वतंत्र हो गए हैं। अब हमें सर्वप्रथम अपनी भाषा चीनी को संभालना है। परतंत्र अवस्था में हम अपनी भाषा चीनी को कायम रख नहीं सके थे। साथियों ने सलाह दी थी कि 4-5 साल बाद अपनी भाषा को अपना लेंगे, किंतु मुखिया ने किसी की सलाह को नहीं मानते हुए चीनी भाषा को देश की भाषा घोषित किया। नेता ने कहा चीन स्वतंत्र हो गया है और हम अपनी भाषा चीनी को छोड़ नहीं सकते हैं। आज की रात से चीन की भाषा चीनी प्रारंभ होगी और उसी रात से वहां चीन की भाषा चीनी प्रारंभ हो गई। भारत में कोई ऐसा व्यक्ति है, जो चीन के समान हमारे देश की भाषा तत्काल प्रारंभ कर दे?

कोई भी कठिनाई आ जाए, हम देश के गौरव और स्वाभिमान को छोड़ नहीं सकते हैं। 70 वर्ष अपने देश को स्वतंत्र हुए हो गए हैं। हमारी भाषाएं बहुत पीछे हो गई हैं। इंग्लिश भाषा को शिक्षा का माध्यम बनाने की गलती हो रही है। मैं भाषा सीखने के लिए इंग्लिश या किसी भी अन्य भाषा को सीखने का विरोध नहीं करता हूं किंतु देश की भाषा के ऊपर कोई अन्य भाषा नहीं हो सकती है।

उन्होंने कहा कि इंग्लिश भारत की भाषा कभी नहीं थी और न है। वह अन्य विदेशी भाषाओं के समान ज्ञान प्राप्त करने का साधन मात्र है। विदेशी भाषा इंग्लिश में हम अपना सब कुछ काम करने लग जाएं, यह गलत है। हमें दादी के साथ दादी की भाषा जो यहां बुंदेलखंडी है, उसी में बात करना चाहिए। जो यहां सभी को समझ में आ जाती है। मैं कहता हूं ऐसा ही अनुष्ठान करें।

2019 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार जबलपुर से यहां होना चाहिए :




17
20
12
1
16
View Result

Countdown

कैलेंडर

april, 2019

चौदस 04th Apr, 201904th Apr, 2019

अष्टमी 13th Apr, 201913th Apr, 2019

17apralldayमहावीर जयंती (तेरस)

चौदस 18th Apr, 201918th Apr, 2019

X