योगसागर जी महाराज (ससंघ) के गोटेगांव पहुंचने की संभावना है।मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज बावनगजाजी में विराजमान हैं आचार्यश्री की जानकारी अब Facebook पर Youtube - आचार्यश्री विद्यासागरजी के प्रवचन देखिए Youtube पर आचार्यश्री के वॉलपेपर Android पर शाकाहारी रेस्टोरेंट Android पर दिगंबर जैन टेम्पल/धर्मशाला Android पर देश और विदेश के जैन मंदिरों एवं जिनालय की जानकारी के लिए www.jaintemple.in विजिट करें Apple Store - शाकाहारी रेस्टोरेंट आईफोन/आईपैड पर Apple Store - जैन टेम्पल आईफोन/आईपैड पर

बड़े बाबा के मंदिर निर्माण की बाधाएं दूर हुईं


सर्वोच्च न्यायालय ने पक्ष में दिया निर्णय, बड़े बाबा के मन्दिर का बचा निर्माण अब पूरा हो सकेगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी देखने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

गुरुवर आचार्य विद्यासागर जी शुक्रवार 9, मई के दिन सिध्दोदय सिद्धक्षेत्र नेमावर में विराजित सन्त शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी को आहार के मध्य सुनाये गयेे एक ऐतिहासिक शुभ समाचार से पूरे जैन जगत में अपार हर्ष-आनन्दऔर उल्लास छा गया। बात दिल्ली में स्थित भारत के सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा कुण्डलपुर (दमोह) के बड़े बाबा भगवान आदिनाथ जी के निर्माणाधीन मन्दिर जी पर दिये गये ऐतिहासिक फ़ैसले से जुड़ी हुई है।

बड़े बाबा के मन्दिर में पाषाण की जितनी भव्य प्रतिमा जी विशाल वेदी जी पर विराजित है, उसकी गरिमा के अनुरूप विशाल पाषाण का हज़ार -पन्द्रह सौ साल तक टिका रहने वाला कलात्मक मन्दिर का निर्माण कार्य तेज़ गति से चल रहा था। भगवान आदिनाथ जी के मन्दिर का निर्माण कार्य चलते न्यायालय में बाधाऐं पुरातत्व विभाग और कुछ लोगों के द्वारा उपस्थित कर दी गयी। प्रकरण सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाया गया । आचार्य श्री को ९ मई को हुए फ़ैसले की जानकारी बतायी गयी कि सर्वोच्च न्यायालय ने पुरातत्व विभाग की याचिका ख़ारिज कर दी है ।

अब बड़े बाबा के मन्दिर का रुका हुआ निर्माण कार्य पूरा किया जा सकेगा। इसी दिन शाम को गुरु भक्ति के बाद निवेदन करने पर महायोगी आचार्य महाराज ने अपने उदबोधन में कहा- आज सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से मंगल अवसर आया है । वर्षों से भक्त बड़े बाबा भगवान आदिनाथ जी के पाषाण के भव्य कलात्मक मन्दिर को जिस रूप में देखना चाहते थे, वह भावना आज पूरी हो गयी है। बड़े बाबा के दरबार में बहुत भक्त हैं।उनमें से मैं एक छोटा सा भक्त हूँ। भगवान हमेशा बड़े होते हैं और भक्त छोटे। भक्ति के विषय में बातें कहने की नहीं, आराधना करने की होती हैं। उसमें तन-मन-धन से सब कुछ न्यौछावर करना होता है ।

बड़े बाबा का काम बड़ा होता है,किन्तु कुछ लोग आकुलित हो जाते हैं । भक्ति में हमेशा बहुत रहस्य छिपा होता है । जब परिणाम सामने आता है, तब बड़े-बड़े भी विस्मित हो जाते हैं और भक्त अपने ढंग से भक्ति करता रहता है । ध्यान रखना भक्त की न हार होती है और न जीत होती है। भगवान ने तो अपने आप (अपनी आत्मा) को जीत लिया है। भक्त उनको आदर्श के रुप में देखते हैं । ऐसे बड़े बाबा हमारे सबके आदर्श हैं। हम अपने आप को देखने का प्रयास कर रहे हैं। अहिंसा-धर्म का महत्व दुनिया को दिखलावेंगे। अहिंसा भाव परक धर्म है। यह परीक्षा से जुड़ा है। इसलिये जब भी अवसर आवे, परीक्षा देने को तैयार रहना चाहिए। परीक्षा देने पर परिणाम सामने आता है । परिश्रम का फल हमेशा मिलता है ।

प्रभु भक्ति की सेवा के क्षेत्र में फल अनेक गुना मिल जाता है। आज आप लोग आनन्द का अनुभव कर रहे हैं। बड़े बाबा की पहचान पूरे विश्व में है। इसलिये आनन्द भी चारों ओर है। आज सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से भक्तों में भक्ति का आनन्द देखने को मिला है। न्यायालय में धर्म का कोई प्रयोजन नहीं रहता। किन्तु उसके निर्णय को सभी मान्य करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय में भक्तों की बात पर सुनवाई हुई थी। उसके निर्णय के बाद आयी हुई बाधा दूर हो गयी है। ये बाधाऐं सबकी भक्ति के प्रभाव से दूर हो गयी हैं। बड़े बाबा के मन्दिर के निर्माण में अब सब लोग दिन-रात एक कर के लग जाय । कार्य को पूर्ण कर लें। भगवान ने भी अनन्त काल के व्यवधान को दूर कर के अपना कल्याण किया ।

उनका दिखाया मार्ग हमारे लिये बहुत महत्वपूर्ण है। निर्णय से आज देव लोग और इन्द्र भी चमत्कृत हो रहे होंगे। भक्ति के इस कार्य में साथ दे रहे होंगे। बाधाऐं समय आने पर ही दूर हो जाती है। कच्चा आम पकाने के लिये उष्मा की आवश्यकता होती है। उष्मा मिलने पर वह पक जाता है। आचार्य ज्ञानसागर जी गुरु महाराज जी की गुरु कृपा से यह सब घटित हुआ है। उनका आशीर्वाद फलीभूत हुआ है। सर्वोच्च न्यायालय की दो सदस्यों की खण्ड पीठ के न्यायमूर्ति माननीय सुरेन्द्रसिंह निज्जर और एच के सीकरी के निर्णय से पुरातत्व विभाग याचिका ख़ारिज हो गयी है ।

कुण्डलपुर मन्दिर ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रहमण्यम ने पक्ष प्रस्तुत किया। ट्रस्ट मन्दिर की निर्माण कमेटी के प्रमुख वीरेश सेठ ने पूरे प्रकरण में दिन -रात एक कर के बडे़ बाबा के मन्दिर निर्माण के लिये निष्ठा के साथ दायित्व का निर्वाह किया। अध्यक्ष सन्तोष सिंघई तथा उनके साथियों का योगदान सराहनीय रहा है। अन्त में तपोनिधि आचार्य विद्यासागर जी ने अहिंसा परमो धर्म की जय के साथ अपना उदबोधन पूर्ण किया।

निर्मलकुमार पाटोदी
विद्या-निलय, 45, शान्ति निकेतन,
(बॉम्बे हॉस्पिटल के पीछे),
इन्दौर-452010
सम्पर्क – ०७८६९९१७०७०
मेल – [email protected]

2019 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार सागर से यहां होना चाहिए :




17
12
20
16
1
View Result

Countdown

कैलेंडर

march, 2019

चौदस 05th Mar, 201905th Mar, 2019

अष्टमी 14th Mar, 201914th Mar, 2019

चौदस 20th Mar, 201920th Mar, 2019

अष्टमी 28th Mar, 201928th Mar, 2019

X