समयसागर जी महाराज का चातुर्मास सागर मेंसुधासागर जी महाराज का चातुर्मास चांदखेड़ी मेंयोगसागर जी महाराज का चातुर्मास कुंडलपुर में मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज का चातुर्मास सम्मेदशिखर में आचार्यश्री की जानकारी अब Facebook पर Youtube - आचार्यश्री विद्यासागरजी के प्रवचन देखिए Youtube पर आचार्यश्री के वॉलपेपर Android पर शाकाहारी रेस्टोरेंट Android पर दिगंबर जैन टेम्पल/धर्मशाला Android पर देश और विदेश के जैन मंदिरों एवं जिनालय की जानकारी के लिए www.jaintemple.in विजिट करें

हाँसी (हरियाणा) में खुदाई में जैन प्रतिमा एवं मंदिर के अवशेष प्राप्त

हरियाणा प्रान्त के हिसार जिले के अतिशय क्षेत्र धर्म नगरी हाँसी में ५७ वर्ष पश्चात, दिगम्बर जैन सन्त परम पूज्य गणाचार्य श्री 108 विराग सागर जी महाराज के शिष्य मुनि 108 श्री विशोक सागर जी महाराज एवं क्षुल्लक 105 श्री विरंजन सागर जी महाराज का चातुर्मास बहुत धुमधाम से हो रहा है। मुनि श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर हाँसी मे ससंघ सुख-साता पूर्वक विराजमान है। मुनि श्री के सान्निधय में अनेक धर्मिक आयोजन हो रहे है।

विदित है कि हाँसी नगर में 56 वर्ष पहले दिगम्बर मुनि का चातुर्मास हुआ था तथा सन 1995 एवं 2007 में आर्यिका संघो के चातुर्मास हुए हैं इस प्रकार 57वें वर्ष में हाँसी के धर्मपरायण भक्तों को असीम पुण्य के उदय से इस वर्ष भव्य चातुर्मास में नित्य प्रति विभिन्न धार्मिक आयोजनों को कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

हाँसी नगर कभी जैनो की नगरी रहा है क्योकि यहां पर प्राचीन किले से सन 1982 में अष्टधातु की 57 प्रतिमायें प्राप्त हुई थी, सभी प्रतिमायें मंदिर जी में विराजमान हैं तबसे यह क्षेत्र अतिशय क्षेत्र के नाम से प्रसिद्ध हुआ है।

यह दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर करीब – करीब तीन सौ वर्ष प्राचीन है, यहां मूल नायक भगवान महावीर की प्रतिमा है जैसा की शहर के 90-92 साल के बुजुर्ग बताते है कि उन्होनें हमेशा मंदिर को इसी रुप में देखा है उनकी याद में कोई फेर बदल नही हुआ तथा उन्होनें अपने पूर्वजों से भी कभी मंदिर जी में किसी निर्माण कार्य अथवा जीर्णोद्धार के बारे में नही सुना इस वर्ष अधिक वर्षा होने कारण मंदिर में कई जगह से पानी टपकता देखकर तथा मंदिर की जीर्ण-शीर्ण अवस्था देखकर महाराज श्री ने समाज को मंदिर का जीर्णोद्धार कराने की प्रेरणा दी तथा महाराज की आज्ञा शिरोधार्य मानकर रविवार 31 अगस्त 2008 को विधि विधान पूर्वक जीर्णोद्धार का कार्य प्रारम्भ किया।

सबसे पहले मूलनायक वेदी के सामने गली की तरफ वाला हिस्सा गिराना प्रारम्भ किया गया तथा महाराज श्री के निर्देशानुसार भगवान की प्रतिमा को दूसरी वेदी में विराजमान करा कर फर्श की खुदाई का कार्य प्रारम्भ हुआ, थोड़ी सी खुदाई के पश्चात दीवार में नीचे प्राचीन वास्तुकला अनुसार दरवाजों के महराब एवं चित्रकारी दिखायी दिये मुनि श्री के पास यह समाचार पहुँचने पर मुनि श्री ध्यान साधना में लीन हो गये तथा क्षुल्लक महाराज जी भगवान के सामने जाप करने लगे। 13 अक्टूबर को क्षुल्लक महाराज जी को बेचैनी सी हुयी तो वे मंदिर जी में जाप करने चले गये। 14 अक्टूबर को भी क्षुल्लक महाराज जी मंदिर में जाप करने लगे तथा प्रवचन के समय भी उपस्थित नही हुए तब महाराज श्री ने प्रवचन के पश्चात आहार से लौटने पर क्षुल्लक महाराज जी से पूछा की क्या बात है तब उन्होनें कहा की आभास हो रहा है की यहां कुछ असामान्य घटना घटने वाली है। कुछ श्रावक श्राविकाओं ने भी अपने सपनों के बारे में बताया तब महाराज जी ने किसी से कुछ नही कहा और अपने धार्मिक कार्यो में लीन हो गये। शाम को महाराज श्री ने सभी को सुचित किया कि यहां खुदाई में कुछ प्राप्त होने के संकेत है। अगले दिन 15 अक्टूबर को प्रात: नित्य नियम पूजन के पश्चात प्रात: 8:40 मिनट से कल्याण मंदिर स्त्रोत का अखण्ड पाठ प्रारम्भ करा दिया तथा खुदाई का कार्य भी धीरे – धीरे चलता रहा । मुनि श्री अपने कमरे में तप में लीन हो गये, क्षुल्लक महाराज अपना जाप करते रहे। दोपहर में 1:30 बजे महाराज श्री अपने कमरे से बाहर आये तथा खुदाई स्थल पर क्षुल्लक जी के साथ पहुँचे और धीरे – धीरे दीवार की ओर से मिटटी खोदने को कहा तब तक समाज के लोग भी एकत्रित होने लगे थे। ठीक 1:48 मिनट पर मिटटी के अंदर प्रतिमा जी का सिर दिखाई देने लगा तब सारा माहौल जयकारों से गूंज उठा तथा धीरे धीरे मिटटी हटाई गई तथा कुछ देर बाद सफेद पाषाण से निर्मित 23 तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ की बिना फन की बहुत ही सुंदर मनोहारी प्रतिमा प्राप्त हुई एवं पूरे समाज में हर्ष की लहर दौड़ गई। कुछ देर में ये समाचार पूरे देश में आग की तरह फैल गया प्रतिमा का शिल्प एवं प्रशस्ति से यह अनुमान है की यह प्रतिमा लगभग 700 – 800 वर्ष से पुरानी है। प्रतिमा का दर्शन करने हेतु आस-पास एवं दूर दराज के क्षेत्रो से भक्तों की असीम भीड़ हांसी पहुंचकर धर्म लाभ अर्जित कर रही है।

– स्वदेश जैन (09911505050)

प्रवचन वीडियो

2021 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार नेमावर से यहां होना चाहिए :




2
1
24
20
17
View Result

कैलेंडर

july, 2021

अष्टमी 02nd Jul, 202102nd Jul, 2021

चौदस 08th Jul, 202108th Jul, 2021

अष्टमी 17th Jul, 202117th Jul, 2021

चौदस 23rd Jul, 202123rd Jul, 2021

अष्टमी 31st Jul, 202131st Jul, 2021

hi Hindi
X
X