दीक्षार्थियों ने मुनिदीक्षा के लिए परमपुज्य आचार्यश्री समयसागरजी महाराज से विनति कीमेरी भावना | Meri Bhavanaकेंद्रीय मंत्री शाह ने आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज के चित्र वाले 100 रुपये के सिक्के का किया विमोचनआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज की याद में भोपाल में बनेगा स्मारकदुनिया को विद्यासागरजी की शिक्षाओं का अनुसरण करना चाहिएः भागवतसंत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलिआचार्यश्री को भावांजलिआचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज ने समाधि लीअष्टान्हिका पर्व का महत्वसाधु जीवन दर्शन

बेटियाँ

Betiyan

ओ सुख चाहने वालों ! सुनो…,
सुता शब्द स्वयं सुना रहा है, कि
‘सु’ यानी सुहावनी अच्छाइयों 
और
‘ता’ प्रत्यय वह
भाव-धर्म, सार के अर्थ में होता है
यानी,
सुख-सुविधाओं का स्रोत…सो-
‘सुता’ कहलाती है
यही कहती है श्रुत-सूक्तियाँ !दो हित जिसमें निहित हों
वह ‘दुहिता’ कहलाती है
अपना हित स्वयं ही कर लेती है
पतित से पतित का जीवन भी
हित से सहित होता है, जिससे
वह ‘दुहिता’ कहलाती है।
आईये…ऐसी बेटियों के साथ मिलकर करें…
एक ओर…’सृजन’

साभार : मूकमाटी से… प.पू. आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज
‘सृजन’ 2015

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