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क्या यही है “कुछ दिन तो गुजारो, गुजरात में” का नारा

फिर हम निचे उतरने लगे और साथ में पुलिस वाला भी उतर रहा था, तब वही निचे उतारते हुए आश्रम पड़ा जहाँ  पर हमारे ग्रुप के लगभग 100 लोग पहुच चुके थे वहा एक पुलिस वाला पहले से था और एक ये जो हमारे साथ आया था इस तरह दो पुलिस वाले थे अब, तब हमारे ग्रुप से कुछ वरिष्ठ लोगों ने पुलिस वाले से कहा आप लोगों को यहाँ पहाड़ पर दर्शन करने वालो की सुरक्षा के लिए रखा गया है तथा ये वर्दी जिसको आप पहने हो ये भारत की आन शान है अगर आप लोग ही वर्दी में ऐसे काम करोगे तो हम सामान्य जनता कहा जायेगी ?अगर रक्षक ही भक्षक बनेगा तो हम कहा जायेंगे और क्या आप दोनों पुलिस वालो को लगता है की हम सफ़ेद कपडे पहनकर महिलाओ और बच्चे के साथ यहाँ कुछ व्यवस्था बिगाड़ने आये थे ? क्या यहाँ हम विवाद करने आया है ? जिनका पुलिस वाले के पास कोई उत्तर नहीं था, फिर हमने उस पुलिस वाले का नाम लिखा और फोटो ली, [दोनों पुलिस वाले फोटो और नाम देने के लिए रेडी नहीं थे, बड़ी मुश्किल से हमने फोटो ली ] फिर सन्मति भाई और मुझे बहुत ज्यादा प्यास लगी थी मानो गला सुख गया था, लेकिन आपको बता दे की हम 450लोगों ने प्रण किया था की खाने की तो बात दूर है, चाहे प्राण निकल जाए पर हम पहाड़ पर एक पानी की बोतल नहीं खरीदेंगे, लगभग 1000 सीढ़ियाँ  उतरने के बाद प्रथम टोंक आई वहा हम सबने पानी पिया, वहा मंदिर में अन्दर सब पानी की व्यवस्था है, और फिर हमारे भाव ये भी थे की जिन लोगों ने पहाड़ पर धर्मं के नाम पर गुंडागर्दी मचाई है उनको तो बिलकुल भी सपोर्ट नी करना ! फिर हम पहली टोंक पर आये और सबने भाव से दर्शन किया तथा लगभग 150ने अभिषेक तथा सामूहिक पूजन किया !

नीचे आकर हम आचार्य निर्मलसागर जी महाराज जी से मिले तथा हमने कहा कि हम एफआईआर  करवाना चाहते है आदि बातें  बताई तो ब्रम्चारी भैया ने हम को कुछ फ़ोन नंबर दिए तब हम लगभग 100 लोग आईएएस  ऑफिसर से मिलने गए [तब धुप बहुत तेज थी ऊपर  से हम बहुत थके हुए थे पर हम नहीं चाहते थे की आगे भी किसी के साथ हो इसलिए हमारी धर्मं भावना के आगे शारीरिक थकान का हमें पता ही नहीं चला] आईएएस  ऑफिसर से हम लोग मिले और उनसे सब बातें  बताई जिसमें  हम अमित मोदी, चन्द्र प्रकाश मित्तल,सन्मति जैन तथा निपुण जैन [ मैं ] हम चारो victim थे, तथा सारी बातें  सुनने के बाद आईएस ऑफिसर जो थे उन्होंने तभी एसीपी  तथा डीसीपी  साहब को फ़ोन किया और ये सारी बातें  बताई तथा कहा की अगर पर्यटकों के साथ ऐसा होता है तो ये बिलकुल भी सहन नहीं होगा इससे गुजरात का नाम खराब होगा,और हम जानते है आप जैन लोग सरल स्वाभावि होते है, फिर उन्होंने एक विशेष बात बोली उस पुलिस वाले के बारे में ‘वो जिसकी खाता है उसकी ही गाता है’. हम पुलिस के अल अधिकारी से ये बात सुनकर बड़े अचम्भे में थे तथा वे बहुत हैरान हुए जब उन्होंने मेरे से सुना कि  पुलिसवाले ने खुद दो डंडे मुझे बारे, तब उन्होंने फिर डीसीपी  साहब के पास जाने का हम सबको कहा तथा हमारी एप्लीकेशन की एक कॉपी अपने पास रखी !

फिर हम डीसीपी साहब के पास गए उनको बातें  बताई तो वे भी थोडा हैरान थे,और उन्होंने तभी कांस्टेबल को बुलाया और कहा इन चारो लोगों के बयान दर्ज करो और अभी पहाड़ पर जाओ और उस पुलिसवाले और सब पंडो को पकड़ कर इनसे शिनाख्त करवा कर उनको उठा कर लाओ ! (वाह रे डीसीपी जैसे आप उनको थाने में नहीं बुला सकते थे और फिर पहचान करवाते है ) (सब मिले हुए हैं !!!!)

फिर हम निर्मलसागर जी महाराज के पास गए और उनको सारा वाकया सुनाया कि डीसीपी साहब ने अभी हमको पहाड़ चढ़कर पंडे और पुलिसवाले की पहचान करने को कहा है, हमें अभी पहाड़ पर जाना होगा तब शाम के 7 बजे चुके थे.  तब महाराज जी बोले जो पण्डे दिन के टाइम में पुलिस वाले के साथ मिलकर ऐसा कर सकते है तो रात को तो आपके साथ कुछ भी हो सकता है और हम पुलिस पर भी विश्वास कैसे करे, जब पुलिस वाला पहाड़ पर भी उनके साथ था? फिर शाम को जाना तो मतलब रात को १-२ बजे तक वापस आना फिर हम ऐसी परिस्थिति में भी नहीं थे कि पहाड़ पर जा पाए हम बहुत थके हुए थे फिर पूरा दिन फिरते फिरते हो गया था ऊपर  से हमने पहले दिन ही खाना खाया था,पूरा से दिन हम भूखे थे, महाराज जी ने कहा जब आप पुलिस वाले का नाम और फोटो दे रहे हो तो उसको पुलिस वाले पकड़ कर क्यों नहीं लाते और थाने में शिनाख्त करवाते ? फिर वो पुलिस वाला ही सब पंडो के नाम भी बताएगा ! तथा महंत भी तो एक ही है तब हमें लगा की मामला इतना सीधा नहीं है फिर जूनागढ़ या कही से कोई हमें guide करने भी नहीं आया ! फिर हवालदार रात को 9 बजे आया की अब चलो पहाड़ पर जैसे कोई बच्चो का खेल हो पहाड़ पर जाना ! तब हमने जाने से इनकार कर दिया और हम फिर उसी रात अहमदाबाद आ गये जहाँ से हमें ट्रेन से दिल्ली वापस आना था!

बस इतना कहना चाहूँगा या तो गिरनार का अस्तित्व भूल जाओ या फिर आगे आकर गिरनार संरक्षण के लिए सम्यक पुरुषार्थ करलो ! ~ श्री सिद्ध क्षेत्र गिरनार की रक्षा, है कर्त्तव्य हमारा, गिरनार तीर्थ है प्यारा, जहाँ नेमी प्रभु ने मोक्ष प्राप्त कर, जीवन अपना संवारा! गिरनार तीर्थ है प्यारा ! जय नेमिनाथ, प्रभु नेमिनाथ !! ये हृदय कम्पित करदेने वाला वाकया  हमारे साथ हुआ जिसको मैंने [निपुण जैन] ने लिखा –

2 Comments

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  • Sab modi ki jaykar karne me lage hain. abhi desh me Election ka mahoul hai. Aise me hamari Pramukh Jain Sansthaon ko press confrence kar ke modi se jawab mangna chahiye. Ho sake to tonkon pe hone wali ghatna ka vedio bhi bana liya jaye to saboot ke taur pe pesh kiya ja sakta hai……….

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2021 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार जबलपुर से यहां होना चाहिए :




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