समयसागर जी महाराज का चातुर्मास सागर मेंसुधासागर जी महाराज का चातुर्मास चांदखेड़ी मेंयोगसागर जी महाराज का चातुर्मास कुंडलपुर में मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज का चातुर्मास सम्मेदशिखर में आचार्यश्री की जानकारी अब Facebook पर Youtube - आचार्यश्री विद्यासागरजी के प्रवचन देखिए Youtube पर आचार्यश्री के वॉलपेपर Android पर शाकाहारी रेस्टोरेंट Android पर दिगंबर जैन टेम्पल/धर्मशाला Android पर देश और विदेश के जैन मंदिरों एवं जिनालय की जानकारी के लिए www.jaintemple.in विजिट करें

मंगल प्रवचन- आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज (08.05.2016)

कुंडलपुर। प्रत्येक आत्मा में उपयोग चेतना विद्यमान है। कोई देव, दानव, कोई मनुष्य है। कोई पढ़ा, कोई अपढ़ है, आदि-आदि। सभी के भीतर चेतना पुंज है। चेतना किस निमित्त से सचेत होती है, हम कह नहीं सकते। कभी सामान्य निमित्त मिलता और सचेत हो जाती है। हम अनुमान भी नहीं कर सकते। हमें बोध नहीं हो पाता। बातें सुन-देख लेते हैं। बहुत पुरुषार्थ करने के बाद भी अनुभूति के क्षण अंतर जगत में लुप्त हो जाते हैं।

उक्त उद्गार विश्ववंदनीय परम पूज्य आचार्यश्री विद्यासागर महाराज ने सुप्रसिद्ध क्षेत्र अतिशय क्षेत्र कुंडलपुर में रविवारीय प्रवचन श्रृंखला में व्यक्त किए।

पूज्य आचार्यश्री ने आगे कहा कि जिस तरह ओंस के कण एक क्षण में नीचे गिरकर धूल में मिल जाते, ऐसे ही हमारे वे क्षण आते-चले जाते हैं। हम उनको संचित कर सकते हैं। चेतना के जागृति के क्षणों को बार-बार याद करके संचित कर सकते हैं। कभी क्षेत्र, द्रव्य, काल, संगति आदि के माध्यम से हमेशा-हमेशा धार्मिक कुछ बातें सुनने-समझने के लिए भूख को बनाए रखें।

आचार्यश्री ने पौराणिक कथा सुकौशल मुनिराज के दृष्टांत को सुनाते हुए बताया कि किस तरह भेद विज्ञान का बोध होता पगडंडी है। दो मुनि महाराज जा रहे हैं। एक सिंहनी आती है और एक मुनिराज को गिरा देती है। भक्षण करती है। इस प्रकार की घटनाएं जब घटती हैं, चिरकाल तक प्रेरणा देती हैं।

आचार्यश्री ने आगे कहा कि बार-बार चिंतन करने से व्यक्ति अपने को संभाल लेता है। संभालने की वृत्ति भेद विज्ञान का कारण है। घायल शरीर पड़ा रहा। भीतर का आत्मतत्व घायल नहीं हआ। वे केवली हो गए। सिंहनी की आंखों में निकल रहे हैं। ये वैराग्य के क्षण हैं। जाति स्मरण हुआ करुणा का स्रोत बह रहा है। बार-बार चिंतन करने से क्रूरता का नाश होता है। भेद विज्ञान से रहस्य खुल जाता है। इस कथा को याद रखें, स्मरण में लाएं, दूसरों को सुनाओगे तो इसका स्वाद ही अलग होगा। भेद विज्ञान का बोध होगा।

जयकुमार जलज ने बताया कि इस अवसर पर पूज्य बड़े बाबा एवं आचार्यश्री ज्ञानसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण एवं दीप प्रज्वलन निहालचन्द्र चेतनजी कोटा (राजस्थान) ने किया। शास्त्र भेंट रंजना भाभी परिवार सरसमल झांझली ने किया। आरती का सौभाग्य पीयूष प्रतीक राहुल केकड़ी ने किया।

इस अवसर पर कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष संतोष सिंघई, वीरेन्द्र बजाज, संदेश जैन, नवीन निराला, मुकेश शाह, देवेन्द्र बड़कुल, शैलेन्द्र मयूर, विमल लहरी, समस्त कमेटी के सदस्यों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।

 

प्रवचन वीडियो

2021 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार जबलपुर से यहां होना चाहिए :




2
24
1
20
17
View Result

कैलेंडर

september, 2021

चौदस 05th Sep, 202105th Sep, 2021

अष्टमी 14th Sep, 202114th Sep, 2021

चौदस 19th Sep, 202119th Sep, 2021

अष्टमी 29th Sep, 202129th Sep, 2021

X