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दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट : इंदौर (म.प्र.)

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दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट

मत भूलो दया को जिस हृदय में ‘दया’ का दरिया लहराने लगे, जिसकी तपस्या से अर्जित जीवन-दर्शन हर हृदय में गुँजरित करने की ललक जग जाए, वह आत्मा मानव जीवन में जन्म धारण करने के कारण ‘विद्यासागर’ कहला सकती है। उन्हीं ‘विद्यासागर’ के आलोकित पथ पर चलकर अनंत सत्य के शिखरों को स्पर्श किया जा सकता है।

‘दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन’ इसी सत्य की किरण को छूने का एक दयामई प्रयास है। ‘निरीह पशुओं के वध से द्रवित व आशीष से प्रसूत ‘दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन’ का गठन पशुओं को कत्लखाने के बजाए उन्हें पालकर जीवन जीने का अधिकार प्रदान करने के उद्देश्य से हुआ है।

अहिंसा की पोषक विचारों की मूकमाटी की इस मूर्ति (संस्था) को हम अपने हाथों से कितने कौशल से गढ़ते हैं, यह हम सबके समर्पण और समर्थन पर निर्भर है।

मानव हृदय का मूल स्पंदनः दया

‘दया का उदय कई प्रकार से फलित होता है। अहिंसामय व्यक्तित्व के प्रभाव को व्यक्त करते हुए स्वामी विष्णुतीर्थजी ने पातंजल योग की दर्शन टीका के सूत्र में स्पष्ट किया है ‘अहिंसा के प्रतिष्ठित या अभय हो जाने से पशु-पक्षी और मनुष्य भी बैर-भाव का त्याग कर देते हैं।’

मानव संस्कृति के आधार ‘दया’ को आदिकाल में भी स्वीकार किया गया था। तब भी माना गया था कि- मनुष्य, पशु-पक्षी, वृक्ष, जल के स्त्रोत, पृथ्वी, आकाश इन सब में प्राण हैं, इनका परस्पर संबंध तथा संतुलित अस्तित्व आवश्यक है।

भगवान, मसीहा और पैगंबर ने दया-रहम के प्रवाह को रुकने नहीं दिया। उनका संदेश है- लोगों की बंदगी करो, अपने उस प्रभुवर (रब) की, जो तुम्हारा और तुमसे पहले जो लोग हुए, उन सबको पैदा करने वाला है; तुम्हारे बचने की आशा इसी प्रकार से हो सकती है। वही तो है जिसने तुम्हारे लिए धरती पर बिछौना बिछाया, आकाश की छत बनाई, ऊपर से पानी बरसाया और उसके द्वारा हर प्रकार की पैदावार निकाल कर तुम्हारे लिए रोजी-रोटी जुटाई। अतः जब तुम यह जानते हो, तो दूसरों को अल्लाह का प्रतिद्वंदी न ठहराओ। कुरान मजीद की ८ व ९ वीं आयत।


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दयोदय चेरिटेबल ट्रस्ट फाउंडेशन के बढ़ते कदमः

फाउंडेशन के पास लगभग २७.५ एकड़ भूमि है। इसमें वनीकरण, घास उत्पादन, जल एवं मिट्टी संवर्द्धन तथा पर्यावरण विकास का कार्य योजनाबद्ध ढंग से प्रारंभ हो चुका है। इस कार्य में क्षेत्र के रहवासी, हरिजन, आदिवासी तथा महिला वर्ग को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे पशु नस्ल सुधार, दूध उत्पादन, प्राकृतिक खाद के उपयोग तथा पर्यावरण संरक्षण व विकास का मार्गदर्शन व रोजगार उपलब्ध होगा।

दयोदय धाम में गौरक्षण व गौ-संवर्द्धन केंद्र का विहंगम दृश्य व वृक्षरोपणी का दृश्य दयोदय धाम के प्राकृतिक परिवेश का दृश्य व योजनानुसार लगाए गए ९०० वृक्षों (आँवला, जाम, नीम, सीताफल, अशोक, नींबू, गुलमोहर आदि) का एक भाग

कार्यक्रम हेतु विकसित होते परिसर का एक भाग


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एक स्वप्न, एक विचार जिसे साकार करना हैः

दयोदय फाउंडेशन ने जीव दया की भावना से प्रेरित होकर २७.५ एकड़ का एक विशाल भूखंड खरीदा है। वहाँ गौशाला के साथ पर्यावरण वानिकी भी प्रारंभ की गई है।

देशव्यापी गौशालाओं का अनुभव यह है कि यह अत्यंत कठिन व खर्चीला कार्य है। फिर भी यह कार्य तो करना ही है। यह ट्रस्ट का उद्देश्य भी है। यह तभी संभव है, जब फाउंडेशन की ओर सभी तरफ से सहयोग के हाथ बढ़ें/संस्था के समस्त खर्चों की पूर्ति के लिए स्व वित्त व्यवस्था का विकास हो। इस दिशा में कुछ ऐसे भी कदम उठाना होंगे- जैसे :-

१. कार्यस्थल को प्रतिष्ठा दिलाना होगी ताकि जन समुदाय आकर्षित होकर आएँ और संस्था को अनुदान प्राप्त हो।

२. स्थल को प्रतिष्ठा दिलाने के लिए संभावित उपाय-

  • स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाए।
  • क्षेत्र को आर्थिक स्वनिर्भरता वाले शिक्षण संस्थान में बदला जाए।
  • स्थाई आय प्रदान करने वाली गौ आधारित योजनाएँ प्रारंभ की जाएँ।
  • स्थल पर धार्मिक केंद्र विकसित किया जाए।

पर्यटन स्थल का रूप प्रदान करने के लिए-

  • देश में इधर-उधर पड़ी हुई प्राचीन जैन मूर्तियों का संग्रहालय विकसित किया जाए। साथ में चित्रात्मक वीथिका तैयार की जाए।
  • बच्चों के लिए मनोरंजन पार्क विकसित किया जाए।
  • इंदौर-उज्जैन मार्ग पर शुद्ध शाकाहारी रेस्टोरेंट निर्मित किया जाए।
  • आधुनिकता लिए हुए छोटा-सा आकर्षक चैत्यालय बनाया जाए।
  • पहुँच मार्ग, पानी, बिजली व सुरक्षा की समुचित व्यवस्था बनाई जाए।
  • क्रमबद्धता से कुछ कार्यक्रम किए जाएँ।
  • गौशाला को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया जाए।
  • मुनि संघ के चातुर्मास की सुविधा विकसित की जाए।

जब तक इस स्थल पर लोगों का आना-जाना नहीं बढ़ेगा, तब तक यहाँ विकास और आत्मनिर्भरता पाना कठिन है।


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करुणा का करुण क्रन्दन

पशु और पक्षी आज भी सभ्यता की अवहेलना से असमय ही मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। इन्हें मृत्यु का ग्रास बनाने वाला और कोई नहीं सभ्यता का रखवाला स्वयम्‌ मानव ही है।

विडंबना ही है कि पशु-पक्षियों के साथ वन्य जीवन काल में फल-फूल खाकर जीवन यापन करने वाला मनुष्य माँस भक्षी हो गया? जिनकी मदद से जीवन की गाड़ी चलती थी, उन्हें ही खाने लगा। माँस-भक्षण के कारण मनुष्य के शरीर की आंतरिक और मानसिक स्थिति गड़बड़ा गई। तामसिक प्रवृत्ति के कारण वह क्रूर होने लगा। उसके स्वभाव का विकार सभ्यताओं के विनाश का कारण बन गया। यद्यपि नेमि, महावीर और गाँधी के प्रयत्नों ने इस क्रूरता पर लगाम लगाने का प्रयास किया, तब भी यह क्रूरता बढ़ती ही जा रही है। गाय को माँ और कामधेनु मानने वाला भारतीय इनको कत्ल करने का व्यवसाय कर रहा है। खून से सनी इस व्यावसायिकता के दानव ने मानवीय संवेदना को कुंठित कर दिया है। जिस गौवंश के पूजन को आदर्श बनाकर कृष्ण ने राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने के लिए गौवंश की महत्ता का प्रतिपादन किया। शिव ने गले में सर्प को धारण कर विषधर प्राणी तक को स्नेह का संदेश दिया और बैल को अपने नजदीक स्थान देकर सम्मान प्रदान किया। नेमिनाथ व महावीर ने प्राणीमात्र के साथ (समवशरण में) बैठकर धर्म के उपदेश दिए। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने तो यहाँ तक कहा है कि- ‘गाय बचेगी तो मनुष्य बचेगा। गाय नष्ट होगी तो उसके साथ, हमारी सभ्यता और अहिंसा प्रधान संस्कृति भी नष्ट हो जाएगी और पीछे रह जाएँगे भूखे-नंगे हड्डी के ढाँचे वाले मनुष्य। अतः निर्बल और निःसहायों की सेवा मान कर गौ उपासना करें। खेद की बात यह है कि फिर भी हम क्रूर होते जा रहे हैं। करुणा के क्रंदन को ठुकराकर नष्ट पर्यावरण के साथ संस्कारहीन समाज बनाने पर आमादा हो गए हैं।

रेवती ग्राम में स्थित दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन की भूमि का विवरणः

स्थानः– यह भूमि इंदौर-उज्जैन मार्ग पर ग्राम पंचायत भँवरासला, तहसील-साँवेर, जिला इंदौर के अंतर्गत है। प्रवेश मार्ग टोल टैक्स नाका के पास से है। रेवती ग्राम से २ कि.मी. दूर

आगरा-मुंबई मार्ग से विजयनगर- एम.आर.-१० टेन मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है।

स्थान का महत्वः– यह अहिल्या माता की नगरी इंदौर और महाकाल की नगरी उज्जैन मार्ग पर स्थित है।


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संकल्प जिन्हें साकार करना हैः

गौशाला प्रवेश द्वार ५१०००/-
प्रति माह प्रति गाय भोजन खर्च ५०१/-
प्रति गाय त्रैमासिक व्यय १५०१/-
प्रति गाय अर्द्धवार्षिक व्यय २५०१/-
प्रति गाय वार्षिक व्यय ५००१/-
१२५ गाय पर प्रतिदिन व्यय २५०१/-
बागवानी व्यय प्रतिमाह ३००१/-
पशुओं का एक माह चिकित्सा व्यय ११०१/-
संत निवास प्रति कक्ष निर्माण लागत राशि १,२५,०००/-
सामाजिक सभागृह निर्माण राशि १०,००,०००/-
ओवर हेड टैंक निर्माण ३,५०,०००/-
पानी का कुँआ निर्माण लागत ४०,०००/-
प्रति पौधा वार्षिक व्यय २५०/-

अन्यः

१. भूमि विकास

२. स्वागत द्वार

३. आंतरिक सड़कों का निर्माण

४. नलकूप खनन

५. प्रशासकीय कार्यालय

६. भंडार गृह

७. पशु चिकित्सालय (कुल २० कक्ष)

८. उपकरण ट्रैक्टर व ट्रॉली

९. पशु चिकित्सा शोध भवन

१०. औषधि भवन

११. चारा कटाई मशीन

१२. गोबर गैस प्लाँट


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दयोदय पशु संवर्द्धन केंद्र (गौशाला)

कार्यालयः- २२, जाय बिल्डर्स कॉलोनी (रानी सती गेट) इंदौर- ४५२००३ (म.प्र.)

संपर्कः- ०७३१-५०८२९०२ मो. ९४२५०-८१००९

संचालकः- दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट

कार्यालयः- ५०, शिवविलास पैलेस, राजबाड़ा, इंदौर- ४५२००४ (म.प्र.)

संपर्कः-०७३१- २५३७५२२ मो. ९४२५०-२५३५२१, २५३६७६५, २५३०६४५

म.प्र. लोक न्यास, इंदौर क्र. आर/७०८/दि. ०७-०९-२०००

म.प्र. गौसेवा आयोग, भोपाल रजि.क्र.- ४१० दि. ०९-११-२००१

भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड, चेन्नई, रजि. क्र. १०-३१७/२००/जी.ज.क./एम.पी./एन.आर.आई.

ऐसी चीजें पहनिए जिसके लिए किसी का कत्ल नहीं किया गया हो…

  • गाय के कत्ल का पाप केवल (बीफ) माँस खाने से नहीं होता
  • चमड़े के जूते पहनने से भी होता है
  • और पर्स, बेग और अटैची के प्रयोग से भी
  • जैकेट और बेल्ट के प्रयोग से भी,
  • और कार के गद्दों और सोफा के कवर के प्रयोग से भी।
  • आधुनिक चमड़ा :- पशु की नैसर्गिक मृत्यु से नहीं, जीवित पशु को कत्ल करने से बनता है। ९९ प्रतिशत चमड़ा कत्लखाने से उपलब्ध होता है।
  • स्मरण रहे, चमड़े के उपयोग से माँस सस्ता बिकता है। चमड़े की वस्तुओं का त्याग करने से- माँस अधिक महँगा बिकेगा। कसाईयों का मुनाफा घट जाएगा।

यदि हम चाहते हैं कि माँसाहारियों की संख्या कम हो, तो हमें चमड़े का उपयोग त्याग देना चाहिए। इसी में समझदारी है। चमड़े की वस्तुओं का उत्तम विकल्प बाजार में उपलब्ध है। स्वच्छ पर्यावरण सबसे अधिक प्रदूषित चमड़ा उद्योग से होता है।


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पत्र व्यवहार पता

५०, शिव विलास पैलेस, राजबाड़ा,

इंदौर- ४५२००४ (म.प्र.)

संपर्कः- +९१-७३१-२५३७५२२, मो. +९१-९४२५०-५३५२१, +९१-९४२५०-८१००९

<td class="title" valign="top">करुणा का करुण क्रन्दन</td>
              </tr>
              <tr>
                <td valign="top">पशु और पक्षी आज भी सभ्यता की अवहेलना से असमय ही मृत्यु का शिकार हो रहे हैं। इन्हें मृत्यु का ग्रास बनाने वाला और कोई नहीं सभ्यता का रखवाला स्वयम्‌ मानव ही है। <p>विडंबना ही है कि पशु-पक्षियों के साथ वन्य जीवन काल में फल-फूल खाकर जीवन यापन करने वाला मनुष्य माँस भक्षी हो गया? जिनकी मदद से जीवन की गाड़ी चलती थी, उन्हें ही खाने लगा। माँस-भक्षण के कारण मनुष्य के शरीर की आंतरिक और मानसिक स्थिति गड़बड़ा गई। तामसिक प्रवृत्ति के कारण वह क्रूर होने लगा। उसके स्वभाव का विकार सभ्यताओं के विनाश का कारण बन गया। यद्यपि नेमि, महावीर और गाँधी के प्रयत्नों ने इस क्रूरता पर लगाम लगाने का प्रयास किया, तब भी यह क्रूरता बढ़ती ही जा रही है। गाय को माँ और कामधेनु मानने वाला भारतीय इनको कत्ल करने का व्यवसाय कर रहा है। खून से सनी इस व्यावसायिकता के दानव ने मानवीय संवेदना को कुंठित कर दिया है। जिस गौवंश के पूजन को आदर्श बनाकर कृष्ण ने राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने के लिए गौवंश की महत्ता का प्रतिपादन किया। शिव ने गले में सर्प को धारण कर विषधर प्राणी तक को स्नेह का संदेश दिया और बैल को अपने नजदीक स्थान देकर सम्मान प्रदान किया। नेमिनाथ व महावीर ने प्राणीमात्र के साथ (समवशरण में) बैठकर धर्म के उपदेश दिए। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने तो यहाँ तक कहा है कि- 'गाय बचेगी तो मनुष्य बचेगा। गाय नष्ट होगी तो उसके साथ, हमारी सभ्यता और अहिंसा प्रधान संस्कृति भी नष्ट हो जाएगी और पीछे रह जाएँगे भूखे-नंगे हड्डी के ढाँचे वाले मनुष्य। अतः निर्बल और निःसहायों की सेवा मान कर गौ उपासना करें। खेद की बात यह है कि फिर भी हम क्रूर होते जा रहे हैं। करुणा के क्रंदन को ठुकराकर नष्ट पर्यावरण के साथ संस्कारहीन समाज बनाने पर आमादा हो गए हैं।</p></td>
              </tr>
              <tr>
                <td valign="top">&nbsp;</td>
              </tr>
              <tr>
                <td class="title">रेवती ग्राम में स्थित दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन की भूमि का विवरणः </td>
              </tr>
              <tr>
                <td valign="top"><b>स्थानः</b>- यह भूमि इंदौर-उज्जैन मार्ग पर ग्राम पंचायत भँवरासला, तहसील-साँवेर, जिला इंदौर के अंतर्गत है। प्रवेश मार्ग टोल टैक्स नाका के पास से है।</td>
              </tr>
              <tr>
                <td valign="top">रेवती ग्राम से २ कि.मी. दूर<br>
                  आगरा-मुंबई मार्ग से विजयनगर- एम.आर.-१० टेन मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है।<p><b>स्थान का महत्वः</b>- यह अहिल्या माता की नगरी इंदौर और महाकाल की नगरी उज्जैन मार्ग पर स्थित है।</p></td>
              </tr>
              <tr>
                <td align="right"><img src="../images/top.gif" height="10" width="10">
                  <a href="#">ऊपर</a></td>
              </tr>
              <tr>
                <td class="title" valign="top">संकल्प जिन्हें साकार करना हैः</td>
              </tr>
              <tr>
                <td align="center"> <table border="0" cellpadding="4" cellspacing="0" width="60%">
                    <tbody><tr>
                      <td width="80%">गौशाला प्रवेश द्वार</td>
                      <td width="20%">५१०००/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">प्रति माह प्रति गाय भोजन खर्च</td>
                      <td width="20%">५०१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">प्रति गाय त्रैमासिक व्यय</td>
                      <td width="20%">१५०१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">प्रति गाय अर्द्धवार्षिक व्यय</td>
                      <td width="20%">२५०१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">प्रति गाय वार्षिक व्यय</td>
                      <td width="20%">५००१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">१२५ गाय पर प्रतिदिन व्यय</td>
                      <td width="20%">२५०१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">बागवानी व्यय प्रतिमाह</td>
                      <td width="20%">३००१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">पशुओं का एक माह चिकित्सा व्यय</td>
                      <td width="20%">११०१/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">संत निवास प्रति कक्ष निर्माण लागत राशि</td>
                      <td width="20%">१,२५,०००/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">सामाजिक सभागृह निर्माण राशि</td>
                      <td width="20%">१०,००,०००/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">ओवर हेड टैंक निर्माण</td>
                      <td width="20%">३,५०,०००/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">पानी का कुँआ निर्माण लागत</td>
                      <td width="20%">४०,०००/-</td>
                    </tr>
                    <tr>
                      <td width="80%">प्रति पौधा वार्षिक व्यय</td>
                      <td width="20%">२५०/-</td>
                    </tr>
                  </tbody></table></td>
              </tr>
              <tr>
                <td class="title">अन्यः</td>
              </tr>
              <tr>
                <td>१. भूमि विकास<br>
                  २. स्वागत द्वार<br>
                  ३. आंतरिक सड़कों का निर्माण<br>
                  ४. नलकूप खनन<br>
                  ५. प्रशासकीय कार्यालय<br>
                  ६. भंडार गृह<br>
                  ७. पशु चिकित्सालय (कुल २० कक्ष)<br>
                  ८. उपकरण ट्रैक्टर व ट्रॉली<br>
                  ९. पशु चिकित्सा शोध भवन<br>
                  १०. औषधि भवन<br>
                  ११. चारा कटाई मशीन<br>
                  १२. गोबर गैस प्लाँट</td>
              </tr>
              <tr>
                <td align="right"><img src="../images/top.gif" height="10" width="10">
                  <a href="#">ऊपर</a></td>
              </tr>
              <tr>
                <td class="subHeading">दयोदय पशु संवर्द्धन केंद्र (गौशाला)</td>
              </tr>
              <tr>
                <td>
				<b>कार्यालयः-</b> २२, जाय बिल्डर्स कॉलोनी (रानी सती गेट) इंदौर- ४५२००३ (म.प्र.)<br>
				<b>संपर्कः-</b> ०७३१-५०८२९०२ मो. ९४२५०-८१००९ <br>
				<b>संचालकः-</b> दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट<br>
				<b>कार्यालयः-</b> ५०, शिवविलास पैलेस, राजबाड़ा, इंदौर- ४५२००४ (म.प्र.)<br>
                <b>संपर्कः-</b>०७३१- २५३७५२२ मो. ९४२५०-२५३५२१, २५३६७६५, २५३०६४५ <br>
                म.प्र. लोक न्यास, इंदौर क्र. आर/७०८/दि. ०७-०९-२०००<br>
                म.प्र. गौसेवा आयोग, भोपाल रजि.क्र.- ४१० दि. ०९-११-२००१<br>
                भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड, चेन्नई, रजि. क्र. १०-३१७/२००/जी.ज.क./एम.पी./एन.आर.आई.
				</td>
              </tr>
              <tr>
                <td>&nbsp;</td>
              </tr>
              <tr>
                <td class="title">ऐसी चीजें पहनिए जिसके लिए किसी का कत्ल नहीं किया गया हो...</td>
              </tr>
              <tr>
                <td><ul>
                    <li>गाय के कत्ल का पाप केवल (बीफ) माँस खाने से नहीं होता </li>
                    <li>चमड़े के जूते पहनने से भी होता है </li>
                    <li>और पर्स, बेग और अटैची के प्रयोग से भी </li>
                    <li>जैकेट और बेल्ट के प्रयोग से भी, </li>
                    <li>और कार के गद्दों और सोफा के कवर के प्रयोग से भी। </li>
                    <li>आधुनिक चमड़ा :- पशु की नैसर्गिक मृत्यु से नहीं, जीवित पशु को कत्ल करने से बनता है। ९९ प्रतिशत चमड़ा कत्लखाने से उपलब्ध होता है। </li>
                    <li>स्मरण रहे, चमड़े के उपयोग से माँस सस्ता बिकता है। चमड़े की वस्तुओं का त्याग करने से- माँस अधिक महँगा बिकेगा। कसाईयों का मुनाफा घट जाएगा।</li>
                  </ul>
                  <p>यदि हम चाहते हैं कि माँसाहारियों की संख्या कम हो, तो हमें चमड़े का उपयोग त्याग देना चाहिए। इसी में समझदारी है। चमड़े की वस्तुओं का उत्तम विकल्प बाजार में उपलब्ध है। स्वच्छ पर्यावरण सबसे अधिक प्रदूषित चमड़ा उद्योग से होता है।</p></td>
              </tr>
              <tr>
                <td align="right"><img src="../images/top.gif" height="10" width="10">
                  <a href="#">ऊपर</a>

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