| प्रतिभास्थली | प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ |
 
प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ
 

प्रतिभास्थली शिक्षा-जगत में आचार्य श्री विद्यासागरजी मुनि महाराज के वात्सल्य और दीर्घदृष्टि से आपूर्त्य मार्गदर्शन की परिणति है। यह एक ऐसा सावास शिक्षा संस्थान है, जहाँ प्राचीन एवं नव्य आध्यात्मिक विरासत एवं वैज्ञानिक उपलब्धि के समन्वय को व्यक्त करने वाली छात्राओं के सर्वतोभद्र व्यक्तित्व का विकास होना है। केंद्रीय पाठ्यक्रम पर आधारित अँग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्रदान की जानी है।

यहाँ भारतीय संस्कृति, व्यवहारिक जीवन, चरित्र निर्माण, आत्मविश्वास व स्वावलंबन की शिक्षा पर विशेष बल दिया जाना है। बालिकाओं के शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक विकास के साथ उनमें एकाग्रता, संप्रेषण, सृजनात्मकता, संवेदनशीलता का भी विकास किया जाएगा। ज्ञानोदय विद्यापीठ गुरुकुल परम्परा का पोषक, नवीनता में प्राचीनता की झलक लिए शिक्षा का अनुपम संस्थान है।

 

''मनुजो मानवो भूयात्‌। भारतः प्रतिभारतः॥''
मनुष्य सच्चे अर्थों में मानव बने। भारत सम्यक ज्ञान रूपी आभा में निमग्न हो।

जन्म से बालक असभ्य व असामाजिक होता है, परंतु शिक्षा उसकी चेतना को जागृत कर मानव बनाती है। उसमें संस्कार और सुरुचि के अंकुरों का पालन करती है। शिक्षा मानव को अनाश्रितता और अधीनता से ऊपर उठाकर स्वावलंबी बनाती है, जिससे वह दूसरों को भी संस्कारित कर सके। इन्हीं उच्च आदर्शों को अपना लक्ष्य बनाकर प्रतिभास्थली संकल्पित है।

 
• भारतीय संस्कृति के अनुरूप आदर्श नारी के द्वारा समाज की सात्विक प्रगति का मार्ग प्रशस्त करना।
• संस्कृति का संरक्षण व संवर्धन करना।
• कन्याओं के व्यक्तित्व का सर्वांगीण सर्वतोभद्र विकास करना।
• गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना।
• कन्याओं को प्रतिकूलताओं के साथ संघर्ष करने तथा परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में दक्ष करना।
• कन्याओं को अनाश्रितता व अधीनता से ऊपर उठाकर स्वावलंबी बनाना।
• नारी को अपने उत्तरदायित्वों के प्रति जागरूक बनाना।
• शिक्षा को व्यवहारिक व जीवनोपयोगी बनाना।
• राष्ट्रीय एकता, अखंडता एवं देश के प्रति संवेदनशील बनाना।
 

प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ नर्मदा के मनोरम तट पर अंकुरित हो रही है। शहर के कोलाहल से दूर प्राकृतिक वातावरण के बीच में २२ एकड़ तक इसका फैलाव है। यहाँ का नैसर्गिक सौंदर्य एकाग्रता से पढ़ने और आत्मिक विकास में सहायक बनेगा। प्रकृति के बीच प्राकृतिक रूप से विकसित होने का यह एक अनुपम अवसर है।

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'घर से घर की ओर'
किसी भी भवन का निर्माण ईंट, सीमेंट, स्टील, छैनी और हथौड़े से हो सकता है लेकिन शिक्षा के लिए विद्यालय की आवश्यकता है जिसमें भारत के भविष्य का निर्माण हो सके। इन्हीं उद्देश्यों को केंद्रीभूत करते हुए प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ के विद्यालय तथा छात्रावास का निर्माण हो रहा है। इसके प्रत्येक कक्ष की रूपरेखा वास्तुशास्त्र और स्वास्थ्य विज्ञान के आधार पर की जा रही है।

जहाँ सद्भावनाओं के रस से आपूरित शुद्ध सात्विक शाकाहारी भोजन से बालिकाओं के स्वास्थ्य, शरीर और स्वस्थ मन का विकास किया जाएगा।

 

हमें पढ़ाना नहीं अपितु चेतना को मोड़ देना है।
-पू. आचार्य श्री

ज्ञानोदय विद्यापीठ में सर्वांग-संपूर्ण शिक्षा की दृष्टि से विशिष्ट शिक्षा योजना का निर्माण किया है, इस शिक्षा के मुख्य अंग- बौद्धिक, नैतिक, चारित्रिक, शारीरिक, व्यवहारिक और संवेदनात्मक विकास है। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक एक दीप है, जो स्वयं जलकर अपने चारों ओर प्रकाश करता है। ज्ञानोदय-विद्यापीठ की महती शिक्षण योजना में अपनी सक्रिय सहभागिता प्रतिपादित करने के लिए प्रतिभा मंडल की ब्रह्मचारिणी सुशिक्षित बी.एड. अर्हता प्राप्त बहनें संकल्पबद्ध हैं। यहाँ की शिक्षिकाएँ संस्था में कार्यरत नहीं अपितु संस्था की होकर कार्य करेंगी। प्रतिभास्थली में अध्ययन-अध्यापन व विकास के लिए उनका पूरा जीवन समर्पित है। केवल अँग्रेजी भाषा के अध्ययन से अपनी संस्कृति से दूर जाती पीढ़ी को यहाँ तीन भाषाओं के माध्यम से शिक्षा दी जानी है। यहाँ बालिकाएँ संस्कृत भाषा के अध्ययन से अपनी प्राचीन संस्कृति की पहचान करेंगी। राष्ट्रभाषा हिंदी का अध्ययन तथा हिंदी माध्यम, उसे भारत के वर्तमान से परिचित कराएगा तथा अँग्रेजी भाषा व अँग्रेजी माध्यम से अध्ययन करके बालिकाएँ विज्ञान तथा तकनीकी के क्षेत्र में अपना भविष्य सुदृढ़ कर सकेंगी।

यहाँ की बाल केंद्रित शिक्षा पद्धति बालिकाओं की प्रतिभा के उन्नयन के लिए उन्मुक्त आकाश ही प्रदान नहीं करेगी, अपितु आत्मानुशासन की कला उन्हें अपने नीड़ में रहना और उसे सजाना-सँवारना भी सिखाएगी।

 
बहुमुखी व्यक्तित्व को पूर्ण रूप से पल्लवित करने के लिए बालिकाओं के बौद्धिक विकास के साथ मानसिक, शारीरिक, संवेदनात्मक और कलात्मक विकास भी आवश्यक है। अतः पाठ्यक्रम केवल विभिन्न विषयों की किताबों के अध्ययन से पूर्ण नहीं होता, अपितु पाठ्य-सहभागी क्रियाएँ भी उसका एक अभिन्न अंग होती हैं। विभिन्न पाठ्य-सहगामी क्रियाएँ प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ की छवि में नया रंग भरती हैं।
 
'पाक-कला' में निपुणता गृहिणी के जीवन का श्रृंगार है।
सात्विक अन्न से स्वस्थ शरीर और मन के निर्माण के उद्देश्य को लेकर विद्यापीठ में शुद्ध सात्विक तथा पौष्टिक भोजन बनाने की कला सिखाई जाएगी।
 
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