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| दयोदय तीर्थ |
| पंजीयन क्रमांक- ३७५ |
विद्यासागर कह रहे, तिलवारा के तीर।
पशुओं की रक्षा करो, महावीर के वीर॥
लख करो पूजा चाहे तीर्थ करो हजार
जीवों पर करुणा नहीं तो सब कुछ है बेकार |
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अहिंसा का स्वरूप वीरता है। अहिंसा का आधार जीव दया है। दयोदय गौशाला, तिलवारा प्रांगण से जीव दया भाव उदय हेतु आचार्य गुरुवर १०८ श्री विद्यासागरजी महाराज का प्रेरणास्पद शताब्दी का प्रथम वर्षायोग 'भगवान महावीर स्वामी' के २६००वीं जयंती वर्ष में अहिंसा वर्ष की घोषणा का पुष्टीकरण भाव जन-जन को प्रेरणा दे रहा है। |
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| न्यास पत्र |
हमारा यह प्यारा भारत वर्ष ऋषियों-मुनियों की साधना का केंद्र रहा है। भारत के उज्ज्वल भविष्य की नीति निर्धारण का चिंतन चल रहा है, तब क्यों न हम ईमानदारी से आत्मावलोकन करें। भारतीय संस्कृति अहिंसक रही है। कृष्ण की कहानी यहाँ की माटी और पानी में घुली-मिली है। जियो और जीने दो का संदेश देने वाले हमारे देश में मांस निर्यात के निरंतर नए कसाईघरों (कत्लखानों) का निर्माण, निरीह पशुओं का बढ़ता हुआ वध, पशुओं के प्रति बढ़ती हुई क्रूरता/हिंसा, अपंग/वृद्ध एवं अनुपयोगी पशुओं की उपेक्षा, मांसाहार का बढ़ता प्रचलन, प्राणी जन्य उत्पाद अंडा आदि को शाकाहारी बताने का छल आदि हिंसक क्रूरता तथा अनैतिक कार्य सभी अहिंसा प्रेमी और करुण हृदय को व्यथित कर रहे हैं। जिस गति से निरीह पशुओं का वध किया जा रहा है, यही स्थिति रही तो आगामी पंद्रह वर्षों में यह देश पशु-पक्षी विहीन हो जाएगा। संतों, महंतों, ऋषियों, मुनियों का इस ओर ध्यान आकृष्ट हुआ है। परम पूज्य १०८ दिगंबराचार्य संत शिरोमणी श्री विद्यासागरजी महाराज के करुण हृदय से देशोत्थान के लिए मांस निर्यात प्रतिबंध की आवाज निकली, उनके शुभ आशीर्वाद एवं प्रेरणा से संस्कारधानी जबलपुर में गौशाला खोलने के लिए दिगंबर जैन समाज की भावना काफी समय से रही है। इसी बीच परम पूज्य १०८ आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज की आज्ञानुवर्ती शिष्या १०५ आर्यिका दृढ़मति माताजी के ससंघ प्रभावनापूर्ण पावन वर्षायोग १९९८, पिसनहारी मढ़िया जी के दौरान पूज्य आर्यिका संघ के निर्देशन में जबलपुर ने न्यास विलेख का निष्पादन कर उसके पंजीयन का दायित्व एवं न्यास के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु राशि/संपत्ति एकत्रित करने का दायित्व नवयुवकों को सौंपा गया तदानुसार श्री दिगंबर जैन समाज जबलपुर के प्रबुद्ध सक्रिय, निष्ठावान, करुणावान, सक्षम नवयुवक इस न्यास के निर्माण एवं विलेख के पंजीयन का दायित्व पूर्ण कर रहे हैं। पंजीयन के उपरांत नियमों व प्रावधानों के अनुरूप न्यास का प्रबंधन एवं संचालन न्यासियों एवं प्रबंधकारिणी समिति द्वारा किया जाएगा।
धर्म प्रभावना एवं आर्यिका संघ की भावना से प्रेरित होकर श्री दिगंबर जैन समाज जबलपुर ने यह निश्चय किया कि बहुजन हिताय, बहुजन सुखायः, श्रमण संस्कृति के प्रभावनार्थ परमार्थिक गतिविधियों के संचालन करने के पवित्र उद्देश्य से एक आधुनिक गौशाला का निर्माण करने के लिए एक सार्वजनिक न्यास दयोदय पशु संवर्धन एवं पर्यावरण केंद्र (गौशाला) जबलपुर के नाम से स्थापित किया जाए। |
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| न्यास के उद्देश्य |
| १. |
अहिंसा, करुणा का अंतरराष्ट्रीय संदेश जन-जन तक पहुँचाकर मांस निर्यात निषेध हेतु जनमानस बनाना। |
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देश में हो रहे अंधाधुंध पशुवध और मांस निर्यात जैसे क्रूर हिंसक दृष्कृत्यों को रोकना। |
| ३. |
जगह-जगह गौशाला जैसे पशु संरक्षण केंद्र के निर्माण करने की प्रेरणा देश के आर्थिक, नैतिक, धार्मिक उत्थान में सहयोग देना। |
| ४. |
सभी निरीह, बीमार, मूक प्राणियों को संरक्षण प्रदान करना। |
| ५. |
स्लाटर हाउस या वधिकों को बेचे जाने वाले पशुओं की रक्षा कर उनका पालन-पोषण करना, भले ही वे अपंग, वृद्ध या बीमार हों। |
| ६. |
हिंसात्मक तरीके से बनाई जा रही दवाओं के स्थान पर अहिंसात्मक दवाओं का उपयोग करना एवं विलुप्त हो रही जड़ी-बूटियों का शोध कर उत्पादन करना। |
| ७. |
मांस उत्पादन, मांस विक्रय एवं निर्यात पर जनचेतना जागृत कर रोक लगाना एवं उपरोक्त कार्य में रुचि रखने वालों को न्यायिक एवं पुलिस संरक्षण प्रदान करना एवं करवाना। |
| ८. |
पशुओं के अवशिष्ट पदार्थ (गोबर, मूत्र एवं अन्य) का समुचित उपयोग/ विक्रय कर आय प्राप्त करना एवं न्यास के विकास में लगाना। |
| ९. |
पशु जन्य उत्पाद (दूध या उससे बनी सामग्री) का समुचित उपयोग/विक्रय कर आय प्राप्त करना एवं न्यास के विकास में लगाना। |
| १०. |
न्यास के उद्देश्य पूर्ति हेतु शासकीय, अर्द्धशासकीय या दान से भूमि प्राप्त कर लीज, लायसेंस, नियमानुसार अनुज्ञा प्राप्त करना। |
| ११. |
पशुशाला, चिकित्सालय, चरई, चारागाह, जल स्रोत, दवा आदि की व्यवस्था करना। |
| १२. |
न्यास के स्थायी कोष एवं योजनाओं की पूर्ति सरकारी, अर्द्धसरकारी, सामाजिक धार्मिक दानदाताओं से धनराशि एकत्रित करना। |
| १३. |
न्यास के स्थायी, अर्जित तथा संचालित आर्थिक आय कोष से न्यास के हित में चल अचल संपत्तियों का निर्माण करना, क्रय करना, बेचना, किराए से देना या लेना, लायसेंस या पट्टे पर लेना तथा देना, चल तथा अचल संपत्ति की सुरक्षा करना। |
| १४. |
न्यास के उद्देश्यों के समान ही उद्देश्यों की पूर्ति में संलग्न संस्थाओं, न्यासों, केंद्रों, व्यक्ति या व्यक्तियों से मार्गदर्शन, सहयोग लेना तथा देना। |
| १५. |
दिगंबर मुनिराजों, साधु-संतों एवं विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लेना और विकास कार्यों में निरंतर प्रगति करना। |
| १६. |
विकास कार्यों एवं आय-व्यय के संबंध में प्रतिवेदन तैयार कर वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित करना। |
| १७. |
गौशाला स्थल में धर्म प्रभावनार्थ जिनालय एवं संत निवास बनवाना। |
| १८. |
पर्यावरण की दृष्टि से वृक्षारोपण करना, वृक्षारोपण ऐसा हो जो औषधियुक्त एवं आय का साधन हो। |
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| हमारी आवश्यकता है: |
गौशाला निर्माण में १.५० करोड़ रुपयों की अनुमानित लागत है। इसमें गौ आवास, चारा भंडार, दाना भंडार, गोपालक आवास, पशु चिकित्सालय, शोध अन्वेषण शाला, गौ विसर्जित पदार्थों पर आधारित औषधि निर्माण शाला, जल प्रदाय व्यवस्था, सभा कक्ष, कार्यालय के साथ-साथ वृद्धाश्रम निर्माण कार्य प्रमुखतः किए जाते हैं। क्षेत्र विकास हेतु चाहारदीवारी, सड़कें, नलकूप खनन एवं उद्यान निर्माण किया जाना है।
आधुनिकतम चिकित्सा उपकरणों, ट्रैक्टर ट्राली आदि उपयोगी वाहनों के साथ चारा मशीन, अनुसंधान उपकरण, गोबर गैस प्लांट, गेसोलिन विद्युत संयंत्र की आपूर्ति एवं स्थापना के साथ-साथ वृद्धाश्रम में चिकित्सा व्यवस्था की उपलब्धता कराना है।
उपरोक्त सभी व्यवस्थाओं हेतु योग्य एवं कुशल कार्यवाहकों की नियुक्ति वांछित है।
हमारा वार्षिक गौ सेवा व्यय रु. एक करोड़ अनुमानित है। |
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| हम संकल्पित हैं कि: |
- अपंग, बूढ़ी, परित्यक्त, बीमार, असहाय एवं वध हेतु प्रयोजित गायों को प्राप्त कर उनकी सेवा।
- गौ संवर्धन, संरक्षण एवं सेवा।
- गौ उपयोगिता का प्रमाणित पुष्टीकरण, उसके गोबर, मूत्र एवं दूध की आर्थिक उपादेयता स्थापित करना।
- गौ संवर्धन से पर्यावरण संतुलन का प्रामाणिक पुष्टीकरण।
- गायों को स्वस्थ बनाकर गरीब किसानों में आबंटन।
- गायों की देशी प्रजातियों का विकास।
- गौ प्राप्त उत्पाद से गौशाला की आत्मनिर्भरता।
- गौ हत्या के कारणों के क्षरण का प्रयास।
- वृद्धों एवं तिरस्कृत वृद्ध, बीमार महानुभावों की चिकित्सा एवं सेवा।
- वृद्धों के अनुभवों का काम लेने की व्यवस्था।
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| आप बनें निर्माता |
| गौशाला निर्माण में सहयोग प्रदान कर |
| परम संरक्षक |
१,००,०००/- |
| संरक्षक |
५१,०००/- |
| आजीवन सदस्य |
११,०००/- |
| प्रति कमरा निर्माण हेतु |
५१,०००/- |
| प्रति ३० फीट गुणित १२० फीट शेड निर्माण हेतु |
४,२५,०००/- |
| प्रति ६० फीट गुणित १२० फीट चारा गोदाम हेतु |
११,००,०००/- |
| चिकित्सालय निर्माण हेतु |
१०,००,०००/- |
| चिकित्सालय उपकरण हेतु |
७,५०,०००/- |
| वृद्धाश्रम निर्माण हेतु प्रति कमरा |
५१,०००/- |
| जल व्यवस्था हेतु प्रति टंकी (५००० लि.) |
२१,०००/- |
| जल वितरण व्यवस्था प्रति शेड |
५०,००१/- |
| प्रति नलकूप हेतु |
७५,०००/- |
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| दयोदय तीर्थ के निर्माण में दान देकर पुण्य अर्जित करें। |
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| आप बनें गोपालक |
| योजनागत कुल गायों की संख्या १५०० नग |
| प्रति गाय गोद लेने हेतु खर्च |
११०१/- |
| गाय त्रैमासिक व्यय |
१५०१/- |
| गाय अर्द्धवार्षिक व्यय |
२५०१/- |
| गाय वार्षिक व्यय |
५००१/- |
| प्रति १२१ पशुओं पर प्रतिदिन व्यय |
२००१/- |
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| अनुरोध - मूक पशु के त्रैमासिक, अर्द्धवार्षिक अथवा आयु पर्यंत 'दयोदय' पालक बनकर पुण्य लाभ पाएं। |
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| आप बनें वृद्धों के सेवक |
| वृद्ध पालक- कुल अनुमानित संख्या- ७१ |
| प्रतिदिन कुल भोजन व्यय |
२००१/- |
अनुमानित |
| प्रतिदिन कुल औषधि व्यय |
१००१/- |
अनुमानित |
| प्रतिमास कुल भोजन व्यय |
६०,००१/- |
अनुमानित |
| प्रतिमास कुल औषधि व्यय |
३०,०००/- |
अनुमानित |
| प्रति वृद्ध मासिक भोजन व्यय |
७५१/- |
अनुमानित |
| प्रति वृद्ध मासिक औषधि व्यय |
३५१/- |
अनुमानित |
| प्रति वृद्ध त्रैमासिक भोजन व्यय |
२५०१/- |
अनुमानित |
| प्रति वृद्ध त्रैमासिक औषधि व्यय |
१२५१/- |
अनुमानित |
| प्रति वृद्ध वार्षिक भोजन व्यय |
१०,००१/- |
अनुमानित |
| प्रति वृद्ध वार्षिक औषधि व्यय |
५००१/- |
अनुमानित |
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| हमें आपके सहयोग की सदैव प्रतीक्षा है। हमारे द्वारा संपादित कार्यों का निरीक्षण करें, यह विनम्र आग्रह है, अतएव अवश्य पधारें यह मनुहार है। |
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| निवेदक |
समस्त ट्रस्टी प्रबंधकारिणी समिति एवं सदस्य
दयोदय पशु संवर्धन एवं पर्यावरण केंद्र, (गौशाला), जबलपुर |
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| पत्र व्यवहार एवं सहयोग राशि भेजने का पता |
दयोदय पशु संवर्धन एवं पर्यावरण केंद्र (गौशाला) तिलवाराघाट, जबलपुर
मुख्यालयः अरविंद जैन, ३५० निवाड़गंज, जबलपुर (म.प्र.)
फोनः- ०७६१-६५३१७८, ३४८४८०, ५१२६२८ |
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