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रविवारीय प्रवचन 24 अप्रैल से 27 मई (आचार्य श्री)

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मातृभाषा भाव तक पहुचने में सहायक है ! (27 मई 2012) – आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में आयोजित धर्म सभा जो श्रुत पंचमी पर आयोजित थी इस अवसर पर आचार्य श्री विद्यासागर जी ने कहा शरीर का नहीं आत्मा का विकास होना चाहिए ! यहाँ कुछ लोग राजस्थान से आयें है लेकिन प्रायः बुंदेलखंड के हैं ! प्रायः पैसा बढता है तो गर्मी चढ़ जाती है ! हर व्यक्ति की गति प्रगति इस बुद्धि को लेकर नहीं होती ! कुछ लोग चोटी के विद्वान् होते हैं जैसे ललितपुर में एक व्यक्ति चोटी रखता है ! ज्ञान के विकास का नाम ही मुक्ति है ! ज्ञान का विकास जन्म से नहीं मृत्यु से होता है ! अभी आप मरना नहीं सीखे हैं ! मरना सिख लिया तोह जीना सिख लेंगे ! बुद्धि के विकास के लिए मरण अनिवार्य है ! मन का मरण जरुरी है ! उस मन को कैसे मारा जाये ! श्रुत और पंचमी आज का यह दिवस है ! आज का दिन पढ़े लिखे लोंगो का नहीं किन्तु जो मन से सुनता है उसका नहीं दो कानो का है ! मैं मन की बात नहीं किन्तु श्रुत पंचमी की बात कर रहा हूँ ! हमारी सोच श्रुत का निर्माण नहीं करता !

सुनने वाला श्रुत पंचमी का रहस्य समझता है ! जो मन के अन्दर में रहता है उसका भरोसा नहीं रहता है ! किसी के अन्दर में नहीं रहना चाहिए ! आँखे तभी गहराइयों तक नहीं पहुचती ! जो सुनता है उसको मोक्षमार्ग और मुक्ति उपलब्ध होता है ! शार्ट कट भी चकर दार हो सकता है !
केवल माँ की भाषा को ही मात्री भाषा कहा है ! भगवन की भाषा होती है लेकिन पकड़ में नहीं आती है ! भाषा के चक्कर से केवली भगवन भी बचे हैं ! आज के दिन हजारों वर्ष पूर्व ग्रन्थ का निर्माण हुआ था ! श्रुत देवता के माध्यम से ही गुण रहस्य मालूम होता है ! आप लोग दूर – दूर से आयें हैं लेकिन पास से कौन आया है ! गुरु कभी परीक्षा नहीं करते लेकिन आत्म संतुस्ठी के लिए कुछ आवश्यक होता है ! मात्री भाषा भाव भाविनी है वह भाव तक ले जाने में सहायक है ! भाव भाषा को समझना आवश्यक है ! विकास इसलिए नहीं होता है क्योंकि मन भटकता है ! हमारी शिकायत आप करते हो की हमें दर्शन नहीं होते हैं ! आज पास से दर्शन हो गएँ हैं ! हम किससे शिकायत करें आप हमारी जितनी शिकायत करोगे उतना ही माल बिकेगा ! विश्वास के माध्यम से ही श्रुत पंचमी मनाई जा सकती है ! आज ललितपुर से पधारे लोगों ने चातुर्मास के लिए श्रीफल भेट किया , गुना, इंदौर, नेमावर, आदि के लोगों ने भी श्रीफल भेट किया !

मुक्माटी के भावानुवाद उपाश्रम की छाँव के मराठी अनुवाद “उपाश्रमाच्या सावलीत ” जो मुनि श्री निर्वेग सागर जी के हिंदी भावानुवाद से किया गया है उसका विमोचन हुआ एवं “समाधी की समाधी” पुस्तक का एवं “दान चिंतामणि ” पुस्तक का विमोचन हुआ है ! यह जानकारी चंद्रगिरी डोंगरगढ़ से निशांत जैन (निशु) एवं सप्रेम जैन ने दी है !


मैनेजमेंट महतवपूर्ण है……! (20 मई 2012) – आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में आयोजित समाधी दिवस आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का !
ग्रीष्मकालीन ज्यों ही आता है गुरूजी की पुण्य तिथि आ जाती है पिछली बार भी यह अवसर चंद्रगिरी को मिला था इस बार भी मिला है ! तीर्थंकरों के कल्याणक तोह हम मनाते ही है लेकिन पुण्य तिथि मनाने का अलग ही महत्व है ! गुरु उन्नत होते भी उन्नत बनाने में लगाए रखते है! सिद्धि में गुरुओं की बात कई विशेषणों में कई है ! परहित संपादन विशेषण बहुत महत्वपूर्ण दिया है ! प्रायः व्यवस्ताओं के सही नहीं होने के कारण गाड़ियाँ रुक जाती है !.गुरुदेव ने कुछ ऐसी ही बातें हमारे कानो में फुकी थी ! मोक्ष मार्ग में पढ़ा – लिखा ही आगे बढ़ता है यह भूल है ! व्यवस्थित हो तो आगे बढ़ता है ! गुरूजी ने कहा था अच्छे से विज्ञापन करना तो हम वैसे ही विज्ञापन कर रहे है ! महंगाई का जमाना है बाज़ार में मंदी आ गयी है ! व्यवस्था एक ऐसी चीज़ है जिसमें खर्चा होता है ! मैनेजमेंट ठीक हो तो सब ठीक होता है ! अपव्यय (फ़िज़ूल खर्च ) हो तो मैनेजमेंट ठीक नहीं माना जाता है ! प्रत्येक कार्य के लिए लोन लिया जा रहा है ! अलोना (बिना नमक का) भोजन लेना यह ही सलोना है !
भारतीय संस्कृति मितव्ययी होना सिखाती है ! ज्यादा खर्च हो रहा है इसलिए कर्ज हो रहा है ! पुलिस हिलती – डुलती नहीं संकेत में कार्य करती है ! (विशेष कार्यों में ) गुरूजी एक शब्द बोलते थे और कितना असर हुआ यह देखते थे ! एक बार आर्डर दिया जाता है ! मिलट्री में संकेत से ही काम होता है ! संयमी की पुण्य तिथि पर संयम से कार्य करना चाहिए ! संयमी की पुण्य तिथि को समझने के लिए संयम संयम की आवश्यकता होती है! वह ज्ञान वृद्ध, तपो वृद्ध थे ! नहीं हमारी उम्र है न ही तप हैं न ही काया है ! हमारे पास टूटे – फूटे दो ही शब्द है ! गुरूजी को मुलायम शब्द अच्छे नहीं लगते थे ! कमर को ठीक चाहते हो तो दिवार का सहारा ना लो ! कठोर शब्द नहीं किन्तु मित प्रिय शब्द का प्रयोग करो !

याद करने के लिए दिमाग की स्पीड बढाओ, सर्वप्रथम लेखनी अनुचर होती है फिर सहचर हो जाती है ! यह मूक माटी में लिखा है ! मोक्ष मार्ग में लिखना तो होता ही नहीं है ! व्यवस्ताओं में करोडो का व्यय हो रहा है ! गुरूजी कहते हैं हम भक्ति में प्रतिशत लगाते हैं यह गलत है ! दान के लिए दाता से महत्वपूर्ण पात्र होता है ! कार्य करने की क्षमता प्रत्येक व्यक्ति में है, जिन्होंने पूर्व में कार्य किये है वह याद करे एक छोटी सी बात है लेकिन चोटि की बात है ! गुरुदेव ने एक छोटा सा मंत्र दिया था – विद्या का अध्यन महत्वपूर्ण है ! आज कल के बच्चों को विषय चुनने का अवसर दिया जाता है ! इंजीनियरिंग, ऍम बी ए, के क्रिय लोगों को काम में लगा दिया जाता है !

गुरूजी कहते थे थोडा पढो लेकिन काम का पढो ! योग्यता का जहाँ मूल्यांकन नहीं होता है वहां कुछ नहीं होता है ! गुरु जी बहुत गुरु थे व्यवहार ज्ञान उनका बहुत उन्नत था, अध्यात्म का ज्ञान उनकों बहुत अच्छा था ! हमारे गुरु वही के वही रहने वाले नहीं थे ! हमारे गुरु बहुत अच्छे थे जैसे माँ की ऊँगली बच्चे नहीं छोड़ते हैं ऐसे ही हमने नहीं छोड़ी, नहीं तो बाज़ार में घूम जाते ! गुरु मंजिल तक नहीं छोड़ते हैं (भावना से ) संकल्प लिया हुआ बहुत दिन तक टिकता है ! श्रुत पंचमी 26 -05 -2012 शनिवार को मनाई जायेगी प्रवचन , पूजा होगी ! यह जानकारी चंद्रगिरी डोंगरगढ़ से निशांत जैन (निशु संचार)एवं सप्रेम जैन ने दिया है !


अहिंसा की पूजा करो (13 मई 2012) – आचर्य श्री विद्यासागर जी

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ में रविवारीय प्रवचन में आचर्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने कहा की भावों के ऊपर धर्म है भावों के उपन अधर्म है भाव से ही सब कुछ होता है ! आचर्य श्री विद्यासागर जी ने राघव मच्छ के कान में तदुले मच्छ रहता है उसका द्रिस्तान्थ दिया और कहा की आचार्य ज्ञानसागर जी ने बनारस में गम्हा बेचकर बड़े – बड़े शास्त्रों की रचना की हैं ! जीवन को उन्नत बनाने के लिए शिक्षा की आवशयकता है ! आज लड़कियां सेरविसे करने जाती है और घर पर दिन में ताला लगा रहता है और रात्रि में अन्दर से ताला लगे रहता है ! ताला लगा रहना अच्छा नहीं है ! अहिंसा धर्म का पालन एवं पूजा हमें प्रत्येक समय करते रहना चाहिए ! आज के लोगों का खान – पान भी बिगड़ रहा है होटल से तिफ्फिन आता है घर पर खाना नहीं बनता है इसलिए संस्कार बिगड़ते जा रहे हैं !
आज सागर (मध्य प्रदेश ) से बहुत सारे लोग पधारे थे एवं मध्य प्रदेश सरकार के वित्त मंत्री राघव जी, शोभना जैन (यूनीवार्ता दिल्ली ), प्रतिक जैन (इंडिगो एयर लाइंस ) आदि पधारे ! अनिल तिवरी , सदीव पटेल , अभिषेक जैन नागपुर, नरेश (गोपाल अग्रो ) राजनंदगांव आदि उपस्थित थे संगीतकार निखिल जैन डोंगरगढ़ ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किया !
आचार्य श्री ज्ञानसागर जी महाराज का समाधी दिवस 20 -05 -2012 रविवार को है ! यह जानकारी चंद्रगिरी डोंगरगढ़ से निशांत जैन (निशु) ने दी है !


शिकायत जरुरी है ! (4 मई 2012) – आचार्य श्री विद्यासागर जी

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ तीर्थ पर विराजमान दिगम्बराचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की रामचंद्र जी को भी कर्म का उदय आता है जब लक्ष्मण जी को जब मूर्च्छा आई थी यह दृष्ठांत आचार्य श्री ने बताया ! आचार्य श्री ने कहा की लोग हमसे शिकायत करते हैं की हमारे यहाँ नहीं आतें हैं (ललितपुर वालों की ओर इशारा करते हुए) आचार्य श्री ने कहा की हमने वाचना की है ग्रीष्मकालीन, शीतकालीन, महावीर जयंती, अक्षय तृतीया आदि पर्व मनाएं हैं फिर भी लोग कह रहें है की आते नहीं हैं ! पुण्य को गाढ़ा करें अभी पतला है ऐसी रसायन की प्रक्रिया हो जाए तो आपका कार्य हो जायें ! आज ललितपुर से प्रभारी पंचायत कमीटी ने चातुर्मास हेतु श्रीफल भेट किया और आचार्य श्री ने आशीर्वाद दिया ! आचार्य श्री ने कहा की शिकायत भी जरुरी है यह शिकायत करते रहे ! यह जानकारी चंद्रगिरी डोंगरगढ़ से निशांत जैन (निशु) ने दी है !


भाव के द्वारा निवेश होता है (24 अप्रैल 2012) – आचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी

चंद्रगिरी डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ तीर्थ चेत्र पर विराजमान दिगम्बराचार्य श्री विद्यासागर महाराज जी ने कहा की कोई भी कार्य हाँथ में लो उसे पूर्ण करो ! उस दाता की जब तक प्रसंशा नहीं करो जब तक वह भोजन पच नहीं जाए ! नारी की जब तक प्रशंसा नहीं करो जब तक वह बूढी नहीं हो जाए ! राजा की जब तक प्रसंशा नहीं करो जब तक वह यशस्वी नहीं हो जाए ! साधू की जब तक प्रशंसा नहीं करो जब तक वह पार नहीं हो जाए अर्थात संलेखना नहीं हो जायें! जहाज में रत्ना भरकर लायें और किनारे पर डूब जायें ऐसे ही व्यक्ति के साथ होता है !
एक बार एक व्यक्ति आहार देता और फिर शुद्धी बोलता प्रत्येक ग्रास दे बाद शुद्धी बोल रहा था ! प्रशंसा की नहीं की गाफिल हो जाता है ! जैसे छात्र विषय को दोहराता रहता है विषय को इसी प्रकार आप भी करें ! जो जितेन्द्रिय नहीं होगा वह संलेखना में फ़ैल होगा ! शत्रु और मित्र में समता रखना यह श्रावन्य कहलाता है ! आचाय कुन्दकुन्द की प्रवचन सार की गाथा को गुरु जी हमें सुनाते थे !भाव के द्वारा निवेश होता है !
चन्द्र प्रभु भगवान् की प्रतिमा जो 20 फीट की बनना है उसका पाषाण 10 -04 -2012 को विर्जोलिया (राज.) से प्रस्थान करके 15 -04 -2012 को ललितपुर (उ.प्र.) पहुंचा वहां से सागर (म.प्र.) नरसिहपुर (म.प्र.) होते हुए 24 -04 -2012 को अक्षय तृतीया को चंद्रगिरी शेत्र में पहुचने की सम्भावना है ! इसी दिन से शिल्पी पाषाण को परमात्मा का आकार देगा ! लगभग 6 महीने लगेंगे प्रतिमा बन्ने में ! यह जानकारी चंद्रगिरी डोंगरगढ़ से निशांत जैन (निशु) ने दी है !

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