Click here to submit
देश और विदेश के शाकाहारी जैन रेस्तराँ एवं होटल की जानकारी के लिए www.bevegetarian.in विजिट करें देश और विदेश के जैन मंदिरों एवं जिनालय की जानकारी के लिए www.jaintemple.in विजिट करें Apple Store - आचार्यश्री विद्यासागरजी के वॉलपेपर फ्री डाउनलोड करें Apple Store - जैन टेम्पल आईफोन/आईपैड पर Apple Store - शाकाहारी रेस्टोरेंट आईफोन/आईपैड पर दिगंबर जैन टेम्पल/धर्मशाला Android पर शाकाहारी रेस्टोरेंट Android पर आचार्यश्री के वॉलपेपर Android पर Youtube - आचार्यश्री विद्यासागरजी के प्रवचन देखिए Youtube पर आचार्य श्री की जानकारी अब Facebook पर

महावीर भगवान की जय

2,670 views

महावीर भगवान की जय

ज्ञान भरे इंसान की जय, इंसान में महान की जय।

सत्य-अहिंसा-प्रेम-प्रदाता, महावीर भगवान की जय॥

‘बिहार’ के होकर बिहार के विहार से कतराते हैं।
’वैशाली’ के थे इस कारण वय-शाली हो जाते हैं।
’कुण्डग्राम’ से धराधाम पर जग अभिराम बनाते हैं।
वृद्धिमान हो ‘वर्द्धमान’ में महावीरता पाते हैं।

त्रिशला की संतान की जय, सुत-सिद्धार्थ सुजान की जय

सत्य-अहिंसा-प्रेम-प्रदाता, महावीर भगवान की जय॥

‘श्रमण-बन्ध’ द्वारा ‘निगण्ठ’ यदि घोर तपस्या धारी है।
सहज भाव से सद् गृहस्थ भी धर्म ध्यान अधिकारी है।
श्रद्धा के अनुसार सभी ‘जिन’ के आलोक पुजारी हैं।
त्रिलोक की क्या, लोक-लोक परलिक सभी आभारी हैं।

धर्म धुरी ध्रुवमान की जय, पावन पथ प्रस्थान की जय।

जड चेतन तक जैन धर्म के विश्वविदित अभियान की जय।

सत्य-अहिंसा-प्रेम-प्रदाता, महावीर भगवान की जय॥

सबसे बढकर दुख, दुनिया में जन्म मरण का होना है।
कारण केवल कर्म, कर्म-फल का हर बोझा ढोना है।
कर्म फलों के मूल रूप में मन के अंकुर बोना है।

मन हिंसा का मूल, सभी कुछ मन का रोना धोना है।

जन-जीवन-जलयान की जय, संयम-सिन्धु सुजान की जय।
जन्म-मरण के रहस्य भेदी, कर्मठ-कर्म-विधान की जय।

सत्य-अहिंसा-प्रेम-प्रदाता, महावीर भगवान की जय॥

सम्यक दर्शन, ज्ञान, चरित्र, अगर जीवन में आते हैं।
प्रपंच तज, यदि पंच-वृत को श्रद्धा से अपनाते हैं।

मुख्य रूप से अगर अहिंसा-परमो धर्म निभाते हैं।

तो भवसागर तज कर प्राणी सहज मोक्ष पद पाते हैं।
पंच-वृत-परिधान की जय, रत्नत्रय की खान की जय।
ब्रह्मचर्य-अस्तेय-अहिंसा-सत्परिग्रह परिणाम की जय।
सत्य-अहिंसा-प्रेम-प्रदाता, महावीर भगवान की जय॥

– कवि सम्राट निर्भय हाथरसी, हाथरस

One Response to “महावीर भगवान की जय”

Comments (1)
  1. JAI JINENDRA…

Leave a Reply

You may use these HTML tags and attributes: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>

(required)

(required)

Comment body must not contain external links.Do not use BBCode.
© 2017 vidyasagar.net दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट (इंदौर, भारत) द्वारा संचालित Designed, Developed & Maintained by: Webdunia