संत कमल के पुष्प के समान लोकजीवनरूपी वारिधि में रहता है, संचरण करता है, डुबकियाँ लगाता है, किंतु डूबता नहीं। यही भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, चिंतक, कठोर साधक, लेखक, राष्ट्रसंत आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के जीवन का मंत्र घोष है।
आचार्यश्री विद्यासागर जी महाराज अभी दमोह (म. प्र.) में हैं। दमोह में आचार्य श्री के सानिध्य में 3 मार्च से 12 मार्च तक समोशरण मंडल विधान होने जा रहा है।