समय सागर जी महाराज कुण्डलपुर (दमोह) में हैं।सुधासागर जी महाराज बिजोलिया (राजस्थान) में हैंयोगसागर जी महाराज (ससंघ) रामटेक में हैं...मुनिश्री प्रमाणसागरजी महाराज भोपाल में हैं आचार्यश्री की जानकारी अब Facebook पर Youtube - आचार्यश्री विद्यासागरजी के प्रवचन देखिए Youtube पर आचार्यश्री के वॉलपेपर Android पर शाकाहारी रेस्टोरेंट Android पर दिगंबर जैन टेम्पल/धर्मशाला Android पर देश और विदेश के जैन मंदिरों एवं जिनालय की जानकारी के लिए www.jaintemple.in विजिट करें

आचार्य श्री का इंदौर प्रवास : प्रमुख खबरें

पंचकल्याणक स्थल पर अचानक पहुंच गए आचार्य विद्यासागर, सुधरवाई मूर्ति की त्रुटि (23/01/2020)

इंदौर। शहर में पहली बार दिगंबर जैन समाज के 13 मंदिरों के पंचकल्याणक की तैयारियां चमेलीदेवी पार्क गोयल नगर में की जा रही हैं। इन्हें देखने आचार्य विद्यासागर बुधवार दोपहर अचानक पंचकल्याणक स्थल पर पहुंचे। वहां निरीक्षण के बाद विदुर नगर से आई सवा ग्यारह फीट की प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की पद्मासन पाषाण प्रतिमा में त्रुटि को ठीक कराया।

आचार्य विद्यासागर मौके पर दो घंटे रुके, कारीगर को बुलाया और भगवान आदिनाथ के कंधे पर आ रहे बालों को हटाया।
आचार्य विद्यासागर मौके पर दो घंटे रुके, कारीगर को बुलाया और भगवान आदिनाथ के कंधे पर आ रहे बालों को हटाया।

आचार्य ने कुछ देर प्रतिमा को निहारा, फिर साथ चल रहे संघ को कारीगर बुलाने के लिए कहा। संघ से चर्चा कर कुछ दिशा-निर्देश दिए। इसके बाद कारीगर को बुलाया गया और उसे प्रतिमा की त्रुटियां दूर करने के लिए बताया। इससे पहले उसे श्रीफल दिया। इसके बाद कानों के पास से कंधे तक आ रहे बालों को हटवाया। इस दौरान वे प्रतिमा के सामने ही संघ के साथ बैठे रहे। यह प्रतिमा मंगलवार रात ही पंचकल्याणक स्थल पर विदुरनगर से लाई गई थी।

पंचकल्याणक में शामिल होंगी 300 से अधिक मूर्तियां, 150 से अधिक आईं
ब्रह्मचारी सुनील भैया ने बताया कि पहली बार एक साथ 13 मंदिर का पंचकल्याण होने जा रहा है। पंचकल्याणक 26 जनवरी से 1 फरवरी तक होगा। इसमें 300 पाषाण और धातुओं में ढली मूर्तियां भगवान बनेंगी। पंचकल्याणक में अजमेर से 25 और सागर से 7 और पुणे से भी तीन मूर्तियां आई हैं। होशंगाबाद से भी ढाई फीट की अष्टधातु की एक मूर्ति लाई गई है। इसके अलावा पंचबलयति मंदिर स्कीम नंबर 78, वैभव नगर, कनाड़िया, शिखरजी ड्रीम, निर्वाण विहार, छावनी, खातीवाला टैंक आदि मंदिरों का पंचकल्याणक होगा।

प्रशासनिक अमला भी पहुंचा
आयोजन स्थल का जायजा लेने प्रशासनिक अमला भी पहुंचा। ब्रह्मचारी विनय भैया और सुनील भैया के निर्देशन में तैयारियां की जा रही हैं। इस दौरान अधिकारियों ने तैयारियों का जायजा लिया। इस मौके पर दयोदय चेरिटेबल ट्रस्ट के कमल अग्रवाल, संजय मैक्स, जैनेश जैन, प्रियांशु जैन आदि मौजूद थे।

पाषाण को भगवान बनाने की प्रक्रिया का नाम पंचकल्याणक
पाषाण की प्रतिमा को भगवान बनाने की पांच दिनी प्रक्रिया का नाम पंचकल्याणक है। जैन ग्रंथों के अनुसार सभी तीर्थंकरों के जीवन में ये पांच कल्याणक घटित होते हैं।

गर्भ कल्याणक : जब तीर्थंकर प्रभु की आत्मा माता के गर्भ में आती है।

जन्म कल्याणक : जब तीर्थंकर बालक का जन्म होता है।

दीक्षा कल्याणक: जब तीर्थंकर सब कुछ त्यागकर वन में जाकर मुनि दीक्षा ग्रहण करते हैं।

केवल ज्ञान कल्याणक: जब तीर्थंकर को केवल ज्ञान की प्राप्ति होती है।

मोक्ष कल्याणक: जब भगवान शरीर का त्यागकर अर्थात सभी कर्म नष्ट करके निर्वाण या मोक्ष को प्राप्त करते हैं।

Source : Naidunia


(23/01/2020) – Raj Express


1600 छात्राएं कर सकेंगी पढ़ाई, बनेंगे दो भव्य मंदिर (22/01/2020)

इंदौर। रेवती रेंज में बनने वाली प्रतिभास्थली ज्ञानोदय विद्यापीठ में 16 सौ छात्राओं को पढ़ाने के लिए व्यवस्था होगी। इसके अलावा वहां दो भव्य मंदिर भी बनाए जाएंगे, जिसमें कुल 1334 प्रतिमाएं विराजमान की जाएंगी। लगभग 27 एकड़ के परिसर में संत निवास, प्रतिभास्थली, हॉस्टल, सहस्त्रकूट जिनालय, सर्वत्रोभद्र मंदिर, भोजनशाला सहित अन्य निर्माण किए जा रहे हैं। आचार्य विद्यासागर पंचकल्याणक महोत्सव के बाद वहां पहुंचकर इनका शिलान्यास करेंगे।

दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन के सहयोग से 20 साल पहले देखा गया सपना अब साकार हो रहा है। 20 साल पहले ही आचार्य इंदौर एक विधान में पहुंचे थे। उस समय उसकी बची हुई राशि से जमीन खरीदी गई। इसके बाद इसे बनाने का लगातार प्रयास हो रहा था। ब्रह्मचारी सुनील भैया ने बताया कि 27 एकड़ में से लगभग 10 एकड़ जमीन पर ये निर्माण हो रहे हैं, जिसमें प्रतिभास्थली में 16 सौ छात्राओं को सौ ब्रह्मचारिणी दीदी पढ़ाएंगी। वहीं गरीब परिवार की बालिकाओं के लिए शिक्षा भी निशुल्क रखी जाएगी।

प्रतिभास्थली :
रेवती रेंज में प्रतिभास्थली का निर्माण किया जा रहा है। इसमें बनाए जा रहे ज्ञानोदय विद्यापीठ में 16 सौ छात्राओं के पढ़ने की व्यवस्था रहेगी। चौथी से 12वीं तक हिंदी माध्यम में पढ़ाई की व्यवस्था रहेगी। हॉस्टल और भोजनशाला भी होगी। अभी उदय नगर में प्रतिभास्थली चलाई जा रही है।

सहस्त्रकूट जिनालय :
प्रतिभास्थली में ही सहस्त्रकूट जिनालय बनाया जाएगा। यह जिनालय 126 फीट ऊंचा होगा, जिसका निर्माण जैसलमेर पत्थर से होगा। इसमें 1008 प्रतिमाएं विराजित की जाएंगी। सभी प्रतिमाएं सिद्ध भगवान और धातु की होंगी।

सर्वत्रोभद्र मंदिर :
प्रतिभास्थली में ही सर्वत्रोभद्र मंदिर भी बनाया जाएगा। 225 फीट ऊंचा यह मंदिर तीन मंजिल होगा। इसमें अरिहंत भगवान और सिद्ध भगवान की 324 प्रतिमाएं विराजित की जाएंगी। सभी प्रतिमाएं धातु की होंगी।

संत सदन :
प्रतिभास्थली में ही संत निवास भी बनाया जा रहा है। जल्द ही यह बनकर तैयार होगा। यहां पर जैन समाज के आचार्य, संत और श्रीसंघ विश्राम करेंगे।


(22/01/2020) – Raj Express


पाषाण से भगवान बनने के इस महोत्सव में बनें सुपात्र : आचार्य विद्यासागर (22/01/2020)

इंदौर। जब कोई यात्री टिकट लेकर गाड़ी में बैठता है तो उसका टिकट चेक करके उसे निर्विकल्प यात्री घोषित कर दिया जाता है। आप सभी ने पंचकल्याणक महोत्सव का टिकट खरीद लिया। अब आप सभी को निर्विकल्प कर दिया गया है, ताकि अच्छे से अच्छे भाव उत्पन्न कर सको। यहां पर 13 मंदिरों का पंचकल्याणक होने जा रहा है। हम सब भी पाषाण से भगवान बनने वाले महोत्सव के सुपात्र बनें। यह बात आचार्य विद्यासागर ने तिलक नगर में आयोजित धर्मसभा में मंगलवार को कही।

आचार्य ने कहा कि महोत्सव में कुछ तो खुद हवन से बोली लेकर पात्र बन गए। कुछ दूसरों को देखकर और कुछ लोगों को समझाकर पात्र बना दिया गया। जैसे दो बैलों पर किसान जुआरी रख देता है, ताकि वह मिलकर काम कर सकें। वह इधर-उधर नहीं भाग सकते, वैसे ही आप लोगों को जिम्मेदारी दे दी गई है। अब आप लोग भी इधर-उधर कहीं नहीं भाग सकते।

विवाह में पिताजी को आने-जाने की छूट रहती है, लेकिन जिसका विवाह है, वह अब कहीं नहीं जाएगा। मंगलवार को आचार्य के चरणों में प्रक्षालन का सौभाग्य अमित प्रकाशचंद्र जैन और विकास सिंघाई को प्राप्त हुआ। सभा का संचालन ब्रह्मचारी सुनील भैया ने किया। दयोदय चैरिटेबल ट्रस्ट के कमल अग्रवाल ने बताया कि 13 मंदिरों का पंचकल्याणक महोत्सव चमेलीदेवी पार्क गोयल नगर में 26 जनवरी से 1 फरवरी तक मनाया जाएगा।

ब्रह्मचारी सुनील भैया ने बताया कि 13 मंदिरों का पंचकल्याणक महोत्सव आचार्य विद्यासागर के सान्निध्य में मनाया जाएगा। महोत्सव के बाद आचार्य इन 13 मंदिरों में पहुंच सकते हैं। कुछ मंदिर नए हैं और कुछ का जिर्णोद्धार किया गया है।

Source : Naidunia


 पूजा के समय उसका भाव समझें : आचार्यश्री (21/01/2020)

आप प्रतिदिन पूजा करते हैं। पूजा संगीत के साथ भी करते हैं, लेकिन पूजा के भाव को नहीं पकड़ पाते हो तो यह सिर्फ कहने के लिए पूजा है। पूजा से हमारी सांसारिक भूख मिटनी चाहिए। अक्सर होता है कि लोग पूजा के भाव को नहीं समझते, सिर्फ शोर करते रहते हैं। पूजन के जरिये परमात्मा की आराधना होनी चाहिए।

तिलक नगर में आचार्य विद्यासागारजी महाराज के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद थे

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने सोमवार को तिलक नगर में आयोजित धर्मसभा में कही। दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित प्रवचनमाला में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। आचार्य का पाद प्रक्षालन का अवसर रमेशचंद्र और भरतेश बड़कुले परिवार को मिला। इस अवसर पर प्रभात जैन, सुधीर जैन, विजीत रामावत, मुकेश बाकलीवाल ने आचार्य को श्रीफल भेंट किया। पंचकल्याणक महोत्सव के प्रचार-प्रसार प्रमुख कमल अग्रवाल ने बताया कि इस अवसर पर अग्रवाल समाज के प्रेमचंद गोयल, सुभाष गुरु, अरविंद बागड़ी आदि उपस्थित थे। संचालन ब्रह्मचारी सुनील भैया ने किया।

Source : Naidunia


आज का प्रवचन (20/01/2020)

पूजन की पंक्तियों में जो लिखा होता है आप लोग उन पंक्तियों में छिपे गहराई से भाव नहीं समझ पाते। यदि हम उन पंक्तियों पर दृष्टि डालें तो आप लोग समझ सकेंगे। जिनेन्द्र देव की पूजन में अष्ट द्रव्य से पूजन होती है। उसमें प्रथम अर्घ के रूप में छुदा रोग के निवारण के लिए नैवेद्य को आप सभी समर्पित करते हैं लेकिन नैवेद्य क्यों चढ़ाया जाता है? वह नहीं समझ पाते। देखा जाए तो नैवेद्य एक प्रकार का विषय है, क्योंकि वही लड्डू आप भोजन में लेते हैं और वही लड्डू पूजन में समर्पित करते हैं।

जिन्होंने अपनी छुदा को दूर कर दिया। भगवान को साक्षी मानकर, उनके चरणों में हम अर्घ चढ़ाते हैं ।इसका अर्थ यह है कि आप लोग अभी रोगी हैं और भगवान निरोगी। जो व्यक्ति दिन में चार-पांच बार खाता हो इसका आशय यह है कि वह दूसरों की अपेक्षा चार पांच गुना अधिक रोग ग्रसित है हम गाड़ी में पेट्रोल चलाने के लायक ही जो आवश्यक होता है उतना ही डलवाते हैं ,दीपक जलाने के लिए हम उतना ही तेल डालते हैं जितना बाती में तेल से दीपक जल जाए।

तो फिर क्यों पेट में हम अधिक बार बार भोजन डालते हैं। आप को समझना होगा। उसी प्रकार शरीर को उतना ही भोजन कराएं जितना जीवन को चलाने में आवश्यक होता है भगवान आप तो सभी दोषों से मुक्त हैं उन्हें साक्षी मानकर उन्हीं जैसा बनने के लिए हम सभी पूजन करते हैं ।पूजन में भक्ति रस का होना आवश्यक है। भोजन भी एक रोग माना गया है, बार बार भोजन करना महारोगी की पहचान है। अतः पूजन सावधानी से करें और इस प्रकार से करें कि मन गदगद हो जाए।


आचार्यश्री के समक्ष न्योछावर कर दी ‘धनलक्ष्मी’, पल में इकट्ठा हो गए 15.60 करोड़ रुपए से ज्यादा (20/01/2020)

इंदौर। आचार्यश्री विद्यासागर ससंघ के सान्निध्य में चमेलीदेवी पार्क गोयल नगर में होने वाले 13 मंदिरों के पंचकल्याणक के लिए श्रावकों ने गुरु के समक्ष धनलक्ष्मी न्योछावर की। पंचकल्याणक के सभी प्रमुख महापात्रों के लिए 1548 कलश और 1275 श्रीफल (15 करोड़ 60 लाख रुपए ) की बोली लगाई गई।

दयोदय चेरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में 26 जनवरी से 1 फरवरी तक होने वाले ऐतिहासिक पंचकल्याणक के महापात्र चयन रविवार को तिलक नगर में हुआ। प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया, ब्रह्मचारी सुनील भैयाजी के निर्देशन में पंचकल्याणक में महापात्र बनने के लिए लगाई गई बोली की राशि रेवती गांव में बनने वाली प्रतिभा स्थली और भव्य मंदिर के लिए दी जाएगी।

13 मंदिरों के पंचकल्याणक के लिए विशाल पंडाल तैयार किया जा रहा है, वहीं 13 रथ भी पहली बार होंगे। अभी तक 1750 जोड़ों का नामांकन हो चुका है। विश्व का पहली बार इंदौर में महातीर्थ बनाने के लिए ट्रस्ट में 108 न्यासी बनाए गए हैं। सबसे पहली ध्वजारोहण की बोली गुप्त रखी गई। माता-पिता बनने के लिए 54 आवेदन आए थे, जिनमें संजय मैक्स परिवार का चयन हुआ।

देवों को भी खुशी का अनुभव
आचार्यश्री विद्यासागर ने प्रवचन में कहा, महामहोत्सव का आनंद लें। इसमें सभा का संवर्धन तो संभव है, लेकिन कम करना संभव नहीं। अल्प समय में बड़ा काम किया है। आप लोगों के कारण महोत्सव और रचना का बीड़ा उठाया है, वह पुण्यवर्धक है। यह इस युग व काल में आपके कारण संपन्न होने जा रहा है। देवों को भी खुशी का अनुभव हो रहा है। मैंने सोचा भी नहीं था इतना बड़ा कार्यक्रम इंदौर में होगा और मैं भी रहूंगा। पशु-पक्षियों की भी अहिंसा की प्रभावना कर अपना जीवन सार्थक बनाया, आप तो मनुष्य हैं।

महापात्रों के लिए लगी बोली

  • सौधर्म इंद्र – 555 कलश व 555 श्रीफल – उद्योगपति सचिन जैन
  • कुबेर इंद्र – 207 कलश व 207 श्रीफल – आलोक आकाश जैन, कोयला परिवार
  • महायज्ञ नायक – 126 कलश व 126 श्रीफल – सतीश डबडेरा परिवार
  • राजा श्रेयांस – 108 कलश व 108 श्रीफल – प्रकाश मनीष जैन, जैन स्टील परिवार
  • भरत चक्रवर्ती – 45 कलश व 45 श्रीफल – सुरेश दिवाकर
  • सौमप्रभ इंद्र – 36 कलश व 36 श्रीफल – विमलचंद मनोज बाकलीवाल
  • बाहुबली – 36 कलश व 36 श्रीफल – सुधीर समीर डिस्कवरी
  • ईशान इंद्र – 108 कलश व 108 श्रीफल – विमल मुकेश बाकलीवाल
  • शाणत इंद्र – 27 कलश व 27 श्रीफल – जितेंद्र नीरज व अंकित जैन
  • महेंद्र इंद्र – 27 कलश व 27 श्रीफल – देवेंद्र मनोज आरोनवाले

13 पंचकल्याणक में यज्ञ नायक – प्रत्येक 21 कलश

(नोट ) एक कलश का मूल्य एक लाख व एक श्रीफल का एक हजार रुपए तय किया है।)

Source : patrika.com (Sudhir Pandit)


(20/01/2020) – Raj Express

पुण्यों का उदय होने पर मिलता है पंचकल्याणक में सुपात्र बनने का अवसर (20/01/2020)

इंदौर। सौधर्म इंद्र का सिंहासन डोलता है तो वे रक्षा के लिए धनपति कुबेर को निवेदन करते हैं। जब अनंत पुण्यों का उदय होता है तो पंचकल्याणक में पात्र बनने का अवसर मिलता है। पंचकल्याणक के रूप में विधिवत संस्कार डाले जाएंगे। इस प्रक्रिया के माध्यम से अप्रतिष्ठित मूतियों को भगवान स्वरूप देने की प्रक्रिया होगी।

यह बात आचार्य विद्यासागार महाराज ने रविवार को कही। वे तिलकनगर में आयोजित धर्मसभा में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर भव्य 13 मंदिरों में होने वाले पंचकल्याणक के पात्रों का चयन किया गया। दयोदय ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष कमल अग्रवाल ने बताया कि माता-पिता बनने का अवसर संजय मैक्स को, सोधर्म इंद्र का सचिन जैन, धनपति कुबेर को इंद्र बनने का अवसर मिलता है। महायज्ञ नायक बनने का सौभाग्य डबडेरा परिवार को मिला है।

Source : Naidunia


आचार्य विद्यासागर से मिले ज्योतिरादित्य सिंधिया (18/01/2020)

आचार्य विद्यासागर महाराज के दर्शन के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव ज्योतिरादित्य सिंधिया तिलकनगर पहुंचे। दोनों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इस अवसर पर सिंधिया को विभिन्न पुस्तकें भेंट की गईं। सिंधिया जी ने धर्म, समाज एवं धर्म में राजनीति के महत्व को समझा।

चर्चा करते हुए सिंधियाजी ने बताया एक शायर की शायरी से में प्रभावित हूं। उन्होंने बताया मेरा भारत मेरे दादा के समय, मेरे पिताजी के समय व वर्तमान समय के भारत के संबंध में चर्चा हुई। आचार्य श्री ने बताया यह बात बहुत समय पहले मैथलीशरण गुप्त की कविता में भी अच्छा उल्लेख है। मोबाइल के उपयोग की विकृति के संबंध में भी चर्चा हुई व राष्ट्र हित एवं गंभीर विषयों पर प्रकाश डाला। सिंधिया जी को आचार्य श्री की रचित मुकमाटी व ग्रंथ भेट किए।

रविवार को दिन में प्रतिष्ठाचार्य विनय भैयाजी ,ब्रह्मचारी सुनील भैयाजी ने धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न की। इस अवसर पर राज्य शासन मंत्री तुलसी सिलावट जी, इंदौर शहर कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल जी, पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल जी, शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष जैनेश झांझरी ट्रस्ट के नरेंद्र पप्पा जी, संजय जी मैक्स, सचिन जी जैन, कमल जी अग्रवाल, अर्पित पाटोदी के साथ आनंद कासलीवाल, शैलेष जैन, मनीष जैन, मोहित जैन, प्रियांशु जैन सहित समाजजन उपस्थित थे।


पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के लिए प्रमुख पात्रों का चयन

धरती के चलते फिरते भगवन संत शिरोमणि आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ के पावन सानिध्य में 26 जनवरी से 1 फरवरी तक श्री मज्जिनेन्द्र पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महामहोत्सव के लिये आज महोत्सव के प्रमुख पात्रों का चयन हुआ

महामहोत्सव के पुण्यशाली पात्र

  • भगवान के माता पिता:- श्री संजय जी जैन मैक्स
  • सौधर्म इंद्र:- श्री सचिन जी जैन युवा उद्योग रत्न
  • धनपति कुबेर:- श्री आलोक जी जैन कोयले वाले
  • महायज्ञ नायक:- स्वर्गीय श्री सुशील जी डबडेरा परिवार
  • राजा श्रेयांस:-श्री प्रकाश जी सन्दीप जी मनीष जी जैन जैन स्टील परिवार
  • ईशान इंद्र:- श्री विमल चन्द जी मनोज जी मुकेश जी बाकलीवाल परिवार
  • बाहुबली:- श्री सुधीर जी डिस्कवर परिवार
  • भरत चक्रवर्ती:- श्री सुरेश जी दिवाकर गौरझामर वाले परिवार
  • सानत इंद्र:– श्री जितेंद्र जी नीरज जी जैन
  • माहेन्द्र इंद्र:– श्री देवेंद्र कुमार जी मनोज कुमार जी जैन आरोन वाले इंदौर
  • राजा सोम परिवार:- श्री विमल चन्द जी मुकेश जी मनोज जी बाकलीवाल
  • एवम अन्य सभी पुण्यार्जक परिवार
  • पूज्य आचार्य श्री के आशीर्वाद से 13 मन्दिरो के 13 श्रावक श्रेस्ठियो को महायज्ञनायक इंद्र बनने का सौभाग्य मिलेगा

सभी पुण्यार्जक परिवारों को बहुत बहुत बधाई एवम साधुवाद

आप सभी के पुण्य की अनुमोदना एवम नमन


आप लोग अभिमान न करो, स्वाभिमान रखो : विद्यासागर  (18/01/2020)

आप किसी भी संस्था का आरंभ करते हैं सामाजिक, धार्मिक, त्याग, तपस्या आदि की अपेक्षा से, दूसरों के साथ हमारा व्यवहार सुधारने की अपेक्षा से आदि। अंग्रेजी शब्द है ट्रस्ट। इस शब्द का क्या अर्थ है, पता नहीं, लेकिन आप लोगों को क्या मालूम है, वो भी नहीं पता है। हो सकता है आप लोगों को मालूम हो, लेकिन अगर गलती हो तो सुधार लें। ये बहुत आवश्यक है।

ट्रस्ट का अर्थ होता है विश्वास। अब ये विश्वास क्या होता है, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चारित्र यानी मोक्ष मार्ग विश्वास होता है। यानी ट्रस्ट तो जो है नाबालिग वस्तु है, उसे छोटा माना गया है और उसका संरक्षण एवं पालन अनिवार्य होता है, इसलिए उस ट्रस्ट से आप स्वीकार्य करते हैं तो उसके संरक्षण का भार आपके कंधों पर आ जाता है। आप संरक्षक हैं, अनुपालक हैं। यह बात शुक्रवार को आचार्य विद्यासागर महाराज ने तिलक नगर में धर्मसभा में कही।


इंदौर बना रहा इतिहास, 10 मंदिरों का एक साथ होगा पंच कल्याणक : आचार्य विद्यासागर (17/01/2020)

इतिहास बनता नहीं है, बनाना पड़ता है। पिछले साल सागर जिले में सात मंदिरों का पंच कल्याणक हुआ था। अब देखो इंदौर इतिहास बनाने जा रहा है, यहां दस मंदिरों का पंचकल्याणक होने वाला है। जिस तरह पारा किसी के हाथ नहीं आता है, लेकिन जब सुनार पारे को तपाता है तो वो भस्म बन जाता है। अनेक प्रकार के खनिज पदार्थ होते हैं। जब उनका रसायन होता है तो उसमें अनेक परिवर्तन होते हैं। फिर उसमें कितने ही प्रयास किए जाएं वो अपने मूल रूप में नहीं आ पाता है। इस पारे को आप कैसे पहचान सकते हैं। उसकी मूल पहचान यही है वह आपकी पकड़ में नहीं आएगा। आप दुनिया को पकड़ना चाहते हो, थोड़े से पारे को पकड़ नहीं पाते हो। कोई बात नहीं, उसका एक स्वभाव है। यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने गुरुवार को तिलक नगर में अपने प्रवचन में कही।

आचार्यश्री ने कहा कि अनंतकाल से आपका स्वभाव शरीर के बंधन से बना हुआ है। आत्मा को कोई पकड़ नहीं सकता, किंतु आत्मा इस शरीर की पकड़ में आ गई है। पारे को जैसे भस्म बनाने की प्रक्रिया है, वैसे ही प्रक्रिया आपके यहां होने जा रही है। दो-तीन दिन के बाद पात्रों का चयन होगा। यहां पर पंच कल्याणक होगा। भारत वर्ष में हमने आज तक नहीं सुना कि एक साथ दस मंदिर के पंच कल्याणक हों। आप सिर्फ पारे के उदाहरण को ध्यान में रखो, आप सिर्फ अपने आपको को पकड़ो, दूसरों को पकड़ना छोड़ दो।

धर्मसभा में विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु सदाशिव कोकजे सहित अन्य लोगों ने आचार्य को श्रीफल भेंट कर आशीर्वाद लिया। आचार्य का पूजन सुखलिया और सुदामा नगर दिगंबर जैन समाज द्वारा किया गया। कार्यक्रम का संचालन ब्रह्मचारी सुनील भैया ने किया व आभार कमल अग्रवाल ने माना।

10 मंदिरों की सूची इस प्रकार है :

  • वैभव नगर
  • छावनी
  • खातीवाला टैंक
  • शिखर जी ड्रीम
  • 78 सलैया वाला
  • पंचबालयति
  • तपोवन
  • जायसवाल
  • सुखलिया
  • निर्वाणा

Source : bhaskar


व्यक्ति से व्यक्ति को, समाज से समाज को अलग करने का प्रयास पागलपन है – विद्यासागरजी (15/01/2020)

इंदौर (अनुराग शर्मा)। त्याग, तप और ज्ञान के सागर आचार्य विद्यासागरजी से करोड़ों लोगों ने जीवन प्रबंधन सीखा है। अलग-अलग क्षेत्रों के शीर्ष लोगों ने नेतृत्व के गुर सीखे हैं। खुद विद्यासागरजी का जीवन तो प्रतिकूलताओं में आत्मानुशासन का अनूठा उदाहरण है ही। दैनिक भास्कर के अनुरोध पर भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के निदेशक प्रोफेसर हिमांशु राय ने विद्यासागरजी से जीवन प्रबंधन और समाज-देश में अनुशासित नागरिक के रूप में हमारे कर्त्तव्य पर बात की। इसके लिए उन्होंने तिलक नगर स्थित महाराज के प्रवास स्थल पर आचार्यश्री और संघस्थ मुनियों के साथ दिन बिताया।

प्रोफेसर राय : शिक्षा को लेकर हमारी प्रणाली और सोच क्या सही दिशा में है? आज समाज के ताने-बाने को बुनने में शिक्षा की क्या भूमिका हो सकती है?
विद्यासागरजी : शिक्षा बौद्धिक नहीं होती। उसका उद्देश्य समझना होगा। यदि उसके उद्देश्य को समझ लिया तो शिक्षा के बगैर भी सीख सकते हैं। बच्चे यदि माता-पिता की बात सुनते हैं तो शिक्षा का उद्देश्य पूरा हुआ। आज नकारात्मकता और क्रोध सिर्फ इसलिए है कि मन में संतुष्टि नहीं है। इसके लिए शिक्षा में परिवर्तन करना होगा। कुछ लोग व्यक्ति को व्यक्ति से या समाज को समाज से अलग करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनके प्रयासों से कुछ भी सिद्ध नहीं हो पा रहा तो उनका प्रयास पागलपन है, इसे रोकने के लिए भी शिक्षा जरूरी है।

प्रोफेसर राय: अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर आज बड़ी बहस छिड़ी हुई है।
विद्यासागरजी : स्वतंत्रता हासिल करने का उद्देश्य देश का बौद्धिक, सामाजिक और धार्मिक विकास करना था। सभी का हित, सुख, शांति, सहयोग और कर्त्तव्य भी। इसके बाद यदि समय बचता है तो उसका उपयोग जीवन के रहस्यों को समझने के लिए किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता और स्वच्छंदता में अंतर है। संघर्षों के बाद मिली स्वतंत्रता को स्वच्छंदता नहीं समझा जाना चाहिए।

प्रोफेसर राय : अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ दूसरा विषय अभिव्यक्ति का माध्यम यानी भाषा भी है।
विद्यासागरजी : एक बार ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में इंडियन की परिभाषा देखिए। पुरानी सोच वाले, आपराधिक प्रवृत्ति के व्यक्ति को इंडियन कहा गया है। भारत का इतिहास है, इंडिया का नहीं है। हमें देश का नाम बदलकर भारत करना चाहिए। हम उन्नत थे, दूसरों को भी उन्नत बना सकते हैं, वह भारत के माध्यम से ही संभव है, इंडिया से नहीं। चीन, जापान, जर्मनी, रूस और इजराइल ने अपनी भाषा में विज्ञान, प्रबंधन विकसित किए, अंग्रेजी में नहीं। इजराइल की हिब्रू भाषा के शब्दकोश में बहुत कम शब्द हैं, भारत के पास अनेक भाषाएं और शब्दकोश हैं, फिर भी हमें अंग्रेजी चाहिए। जो अभिव्यक्ति हिंदी में हो सकती है, वह अंग्रेजी में संभव नहीं। फिर भी माता-पिता का इस भाषा के प्रति बहुत आग्रह है। इस आग्रह ने बच्चों की सहजता छीन ली है।

प्रोफेसर राय: युवाओं को आपकी सलाह…
विद्यासागरजी : आज का युवा विचार ज्यादा करता है, जिसका कोई प्रयोजन नहीं, उस बारे में बिलकुल न सोचें। अन्यथा भी न सोचें, सिर्फ उपयोगी बातें सोचें। अन्यथा सोचने से शक्ति की भी हानि होती है। समय पर सोचना बेहतर है, बजाय इसके कि समय निकल जाने के बाद सोचें। संयुक्त परिवार में हर किसी का दायित्व होता था। आज वह लाभ तो नहीं मिल रहा, बल्कि हानि हो रही है।

प्रोफेसर राय : एक व्यक्ति परिस्थितियों को बदलने के लिए कहां से पहल करे?
विद्यासागरजी : एक बिंदु को केंद्र मानकर यदि हम एक के बाद एक रेखाएं खींचें तो वे रेखाएं स्वत : एक वलय का रूप ले लेंगी। रेखाएं मिलकर वृत्त बना देती हैं, लेकिन वे स्वयं तो वृत्त नहीं हैं। ऐसे ही पूरा विश्व एक वृत्त है, जिसके केंद्र में स्व है। खुद के और दुनिया के बीच संबंध बनाने के लिए सरल रेखाएं आवश्यक हैं। यदि संबंध बने रहेंगे तो वलय बना रहेगा। कहने का तात्पर्य यह है कि हम अपने आप को देखेंगे तभी विश्व को देख पाएंगे।

Source : Bhaskar.com


वैज्ञानिक ध्यान लगाकर आविष्कार करते हैं, आप भी ध्यान कर सबकुछ पा सकते हैं (15/01/2020)

इंदौर। कभी कोई ऐसा प्रसंग मिल जाता है कि दिमाग पूरा खाली हो जाता है। जैसे दिमाग में कुछ था ही नहीं। यह भारत भूमि है, इसके लिए हमें कोई साक्ष्य देने की आवश्यकता नहीं है। हम हर बात में सोचते हैं कि किसी भी प्रकार से साक्ष्य दें। आप न्यायालय में जाएं, सर्वप्रथम आपको साक्ष्य और साक्षी चाहिए। इस आधार पर ही निर्णय होगा। जिसे आप जमानत भी बोलते हो। असली साक्षी कौन है, यह बहुत महत्वपूर्ण होता है।

यह बात आचार्य विद्यासागर महाराज ने तिलक नगर में मंगलवार को प्रवचन में कही। उन्होंने कहा- विज्ञान भी ध्यान को महत्व देता है, क्योंकि ध्यान लगाकर ही वैज्ञानिक आविष्कार करते हैं। विज्ञान को भी चाहिए कुछ आधार, वह साक्ष्य नहीं चाहता, वह अपना ध्यान चाहता है। आप लोगों के पास ध्यान की सामग्री है, लेकिन आप विज्ञान के युग में बहे जा रहे हैं। आपको सब कुछ उपलब्ध हो सकता है, आपके पास इतनी क्षमता विद्यमान है।

जो व्यक्ति इतिहास को भूल जाता है, वह भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता
आप अपना ध्यान और दिमाग मेरी ओर कर लो, सब कुछ मिल जाएगा, मैं किस-किस को देखूं, लेकिन आप सब मेरी ओर देख सकते हैं। मेरा हाथ आप सबके लिए उठा हुआ है, जब चाहे बस ध्यान लगा लीजिए। भले रात को भी। बस आपको ध्यान लगाने की आवश्यकता है और उसके साथ आस्था भी जुड़ जाती है, फिर रास्ता भी साफ हो जाता है। हमको 8-10 दिन तो हो गए हैं इंदौर में, आगे की योजना आप जानें, हम भविष्य की चिंता नहीं करते, लेकिन जो इतिहास को भूलता है, वह भविष्य का निर्माण नहीं कर सकता है। मंगलवार को आचार्य का उपवास था।

Source : Bhaskar.com


पंचकल्याणक का भव्य ऐतिहासिक आयोजन (14/01/2020)

इंदौर में प्रथम बार संत शिरोमणि परम पूज्य १०८ आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ससंघ ३० शिष्यों के सुसान्निध्य में सात जिनालयों के लिए सामुहिक जिनबिम्ब पंचकल्याणक का भव्य ऐतिहासिक आयोजन होगा।

वाणी भूषण बाल ब्रह्मचारी, प्रतिस्थारत्न ‘विनय भैया जी सम्राट‘

आयोजन : वीर निर्वाण संवत् २५४६ माघ शुक्ल २ से माघ शुक्ल ७ तक रविवार २६ जनवरी से शनिवार १ फ़रवरी तक।

आयोजन स्थल : चमेली देवी पार्क, गोयल नगर, इंदौर (म.प्र)


20 वर्ष पहले इंदौर था वो अब नहीं है, नगरों में बंट गया सब चाह रहे महाराज उनकी गलियों में आ जाएं: विद्यासागर (13/01/2020)

 आचार्यश्री रविवारीय प्रवचन : 12 जनवरी 2020

आचार्य विद्या सागरजी के रविवार को पहली बार विशेष प्रवचन हुए। दर्शन, प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन तिलक…

आचार्य विद्या सागरजी के रविवार को पहली बार विशेष प्रवचन हुए। दर्शन, प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में समाजजन तिलक नगर पहुंचे। आचार्य ने कहा कि अब समझ आ रहा है कि समवशरण, नगर और महानगरों के बाहर ही क्यों? नगरों में और महानगरों में समवशरण आ जाए तो क्या व्यवधान उपस्थित होता है। आप लोगों ने अनुभव किया हो तो बता दो।

मंत्री पटवारी ने भी लिया आशीर्वाद : उच्चशिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने आचार्यश्री का आशीर्वाद लिया। उन्होंने आचार्य द्वारा लिखित मूकमाटी पुस्तक सभी कॉलेज की लाइब्रेरी में रखवाने व पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही। विनय बाकलीवाल भी साथ थे।

आचार्य की विशेष पाठशाला
बदलाव : आचार्य ने कहा इंदौर क्यों बुला रहे हो? इर्द-गिर्द रहते तो भी ठीक था। सारे लोग अब इंदौर तो भूल गए हैं, सब नगर पर आ गए हैं। ये उदय नगर है, ये वैभव नगर है, ये तिलक नगर है। सभी अपने नगर को रट रहे हैं। दूसरे नगर की बात नहीं कर रहे। ऐसी स्थिति में इंदौर को क्या कहना चाहते हैं। सोचो, विचार करो, इसका नाम इंदौर तो है ही नहीं। 20 वर्ष पूर्व का इंदौर था वो अब है ही नहीं। कई नगरों में विभाजित हो गया है। सब चाह रहे हैं कि महाराज उनकी गलियों में आ जाएं।

पुरुषार्थ : आचार्य ने कहा – आप तालियां न बजाएं, मुझे प्रसन्न करने का प्रयास न करें। तालियों में भी बहुत रहस्य गोल हो जाते हैं और आसमान में कहां चले जाते हैं पता नहीं। आकाशवाणी के भी पकड़ में नहीं आते हैं। कोई यंत्र स्थापित कर लो मेरे और दूसरे के भाव क्या हैं। भाव को जब हम प्रेषित करते हैं यह आपके ह्रदय तक चले जाते हैं। शब्दों में निहित भाव क्या हैं इसे देखने, समझने और ढूंढने का पुरुषार्थ करेंगे तब लगेगा कि हम बहुत कुछ हैं।

भाव : हमारे चर्या के लिए संघ उठता है। उस वक्त कई बच्चों को देखता हूं। बालक से पूछते हैं कि क्या चाहिए तो वह कहता है सोला…सोला समझते हो न, वो बच्चा समझता है। क्योंकि महाराज सोले के बिना आहार ग्रहण नहीं करते। उस बालक को सर्दी नहीं लगती। पहले कहता कंधे पर उठाओ, लेकिन जब महाराज आते तब कहता मेरा हाथ भी मत पकड़ो, हम भी परिक्रमा लगाएंगे। हम भी आहर देंगे। ये ही भावों का लेखा-जोखा है।

संस्कार : आज के बच्चे एक रुपया नहीं, नोटों की गड्डियां मांगते हैं। पहले एक पैसा, दो पैसा मांगते थे। उनमें संस्कार रहते थे, लेकिन आज पिता के पास नोटों की गड्डियां हैं तो मेरे पास भी होना चाहिए। वही नोटों की गड्डियां होने से संस्कार दूर हो जाते हैं। कई लोग मेरे पास आते हैं। बच्चों को संस्कार दे दो किसी के पास जाने की जरूरत नहीं है।

Source : Bhaskar


(12/01/2020)


Source : Naidunia 


सपने मातृभाषा में आते हैं तो अंग्रेजी में बात क्यों करते हो (11/01/2020)

इंदौर शहर के बारे में बहुत सुना है। देखा दूसरी बार है। सुना था बहुत प्यास है, अब तृप्त हो जाओ। बार-बार कहा था एक बार इंदौर आ जाओ। ईश्वर ने आपकी सुन ली, अब आप ईश्वर की भी सुनो। प्रतिभास्थली का कार्य शीघ्रता से पूरा कर बच्चों के शिक्षण के मार्ग की कठिनाई दूर करो। यह बात दिगंबर जैन समाज के सबसे बड़े संत आचार्य विद्यासागर ने शुक्रवार को कही।

वे उदय नगर दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित धर्मसभा में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आपको सपने मातृभाषा में आते हैं तो फिर अंग्रेजी में क्यों बात करते हो। दया तो दया है, इसलिए जहां भाषा भाव की अभिव्यक्ति होती है, वहां परमात्व भाषा की बात आती है। आज हम हिंदी भाषा को भूल दासत्व की भाषा अर्थात अंग्रेजी को अपना रहे हैं। ये गलत कर रहे हैं।

 धर्म की पहचान हमेशा अभिव्यक्ति से होती है, भाषा से होती है। हमेशा भावों की अभिव्यक्ति मातृभाषा में ही व्यक्त की जाती है।

मन से काम लो तो मानव बन जाओगे और मन के काम के लिए मन का भाव होना चाहिए और मन के भाव के लिए मातृत्व भाषा यानी मातृभाषा ही मन में आती है। सपने कभी यदि आपको आते हैं तो मातृभाषा में ही आते हैं। विदेशी भाषा में नहीं आते। जब स्वप्न ही आपको मातृभाषा में आते हैं तो फिर आप क्यों अंग्रेजी में बात करते हो। आचार्य का पाद प्रक्षालन मुकेश कुमार संजय कुमार पाटोदी परिवार ने किया।

आहार का सौभाग्य आलोक आकाश कोयला परिवार को मिला। प्रवचन के समय दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के साथ उदय नगर दिगंबर जैन मंदिर के पदाधिकारियों ने श्रीफल भेंट किया। इस मौके पर ब्रह्माचारी सुनील भैया, कमल अग्रवाल, अनिल जैन बांझल, संतोष जैन आदि मौजूद थे।

Source : www.naidunia.com


(11/01/2020)


समाज में छोटे परिवार का चलन, पर इनमें सुख-शांति नहीं रहती : विद्यासागरजी (10/01/2020)

इंदौर – आचार्य विद्यासागर महाराज ने गुरुवार को कहा कि आजकल शहरों में छोटे परिवारों का चलन तेजी से बढ़ता जा रहा है, लेकिन उन परिवारों में सुख और शांति नहीं रहती है। यदि बड़े परिवारों को छोटे परिवारों में बंटने से रोक लिया जाए तो लोगों की आधी परेशानियां तो खत्म हो जाएंगी।

आचार्यश्री ने उदय नगर स्थित जैन मंदिर में शिखरजी यात्रा की पुस्तक के विमोचन के पहले सम्मेद शिखरजी पर संबोधित करते हुए कहा कि मोक्ष के लिए जाना सब चाहते हैं, लेकिन इस मार्ग को लोग काफी कठिन मानते हैं। ऐसा लोगों के देखने के नजरिए के कारण होता है। वे अपना नजरिया बदल लेंगे तो वे मोक्ष के मार्ग पर आसानी से चल सकेंगे। उन्होंने कहा कि लोग अगर अपनी वाणी में झुकाव लाकर लचीलापन लाएं और फिर किसी के लिए शब्दों को मुख से बाहर निकालें तो संसार में कोई भी दुखी नहीं होगा।

Source : Bhaskar.com


जब तक संस्कार नहीं होंगे, बच्चे अपने माता-पिता को सुनाएंगे ही, सुनेंगे नहीं (09/01/2020)

एक दंपती को बहुत मिन्नातों के बाद पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, लेकिन जब वो बढ़ा हुआ तो माता-पिता उसको संत के चरणों में लाए और बोले कि ये सुनता नहीं है, तो संत ने पूछा क्यों ये बहरा है क्या? तो उन्होंने कहा नहीं, बहरा नहीं है। सुनता नहीं है मतलब, अब तो हमें भी सुना देता है। आज अधिकांश माता-पिता इस परेशानी का सामना कर रहे हैं। संस्कारों के अभाव के कारण ये हो रहा है।

यह बात दिगंबर जैन संत आचार्य विद्यासागर महाराज ने बुधवार को उदय नगर दिगंबर जैन मंदिर में कही।

वे दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब तक संस्कार नहीं होंगे तब तक बच्चे अपने माता-पिता को सुनाएंगे ही, सुनेंगे नहीं। जब बच्चे कच्चे घड़े के रूप में रहते हैं, तब उनको संस्कार देने की बात आती है। विद्यालय तो बहुत चल रहे हैं, लेकिन शिक्षा क्या देना है, पाठ्यक्रम क्या होना चाहिए, ये किसी को पता नहीं है। बस विद्यालय चल रहे हैं। इनसे भारत का कल्याण कैसे होगा।

आचार्य ने कहा कि भारतीय भाषा जो हमारी मातृभाषा है, उस भाषा में ही शिक्षा होगी, तब ही हम तरक्की कर पाएंगे, विदेशी भाषा में नहीं। आज न्यायालय में निर्णय तो सुनाया जाता है, लेकिन सामने वाले की भाषा में नहीं, विदेशी भाषा में ही। ये सब भारतीय भाषा के अभाव में हो रहा है, इसलिए हमें अगर अपने संस्कारों को जीवित रखना है तो भारतीय भाषा को ही अपनाना होगा, विदेशी भाषा को छोड़ना होगा और संस्कारों की शिक्षा से ही जीवन को उन्नात करना होगा। इसके बाद प्रवचन सुनने आए तीन स्कूल संचालकों ने कहा कि हमारे स्कूल में हिंदी महत्वपूर्ण है। इसकी महत्ता से समझौता नहीं करेंगे। संचालन ब्रह्मचारी सुनील भैया ने किया। आभार कमल अग्रवाल ने माना।

आचार्य के दर्शन करने के लिए दोपहर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह कृष्ण गोपाल पहुंचे।

उन्होंने ‘हथकरघा, इंडिया नहीं, भारत बोलो और भारत बने भारत’ अभियान के संबंध में चर्चा की। इस मौके पर विधायक रमेश मेंदोला, प्रदीप सुषमा गोयल, दयोदय चैरिटेबल फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से मनोज बाकलीवाल, सचिन जैन, संजय मेक्स, प्रजेश जैन आदि मौजूद थे।

आचार्य विद्यासागर महाराज की प्रेरणा से देश में पांच स्थानों पर संचालित प्रतिभास्थली में से एक डोंगरगढ़ प्रतिभास्थली की छात्रा शिखा पाटनी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से दिल्ली में मुलाकात करेंगी। उन्हें इसका मौका अपनी लेखन की विद्या में पारंगत होने के चलते मिला है। वे इस पारंगत होने का श्रेय आचार्य विद्यासागर को देती हैं। वे 20 जनवरी को पीएम से मुलाकात करेंगी। आचार्य की प्रेरणा और उनके मार्गदर्शन में पांच स्थानों पर प्रतिभास्थली है। इसमें जबलपुर, डोंगरगढ़, छत्तीसगढ़, रामटेक महाराष्ट्र, टीकमगढ़ पपोराजी और इंदौर के नाम शामिल हैं।

Source : Naidunia


सांसद से बोले आचार्य विद्यासागर – आप तो शाकाहारी हैं, इंदौर को बनाइये (07/01/2020)

इंदौर। दिगम्बर जैन समाज के सबसे बड़े संत आचार्य विद्यासागर से मिलने सांसद शंकर लालवानी पहुंचे। सुनिल भैया ने लालवानी का परिचय कराया। कहा कि देश में सबसे ज्यादा वोट लाने वाले सांसद हैं। ये जैन समाज का विशेष ध्यान रखते हैं तो समाज भी इन्हें बहुत पसंद करता है।

आशीर्वाद के बाद आचार्य ने लालवानी को शाकाहारी होने की बात कही। इस पर लालवानी ने कहां कि मैं तो शाकाहारी हूं और पूरी तरह जैन धर्म का पालन करता हूं। इस पर आचार्य का कहना था कि इंदौर शाकाहारी बने इसको लेकर भी प्रयास किया जाना चाहिए।

विद्यासागर एक्सप्रेस ट्रेन डायरी का विमोचन करेंगे आचार्य
आचार्य विद्या सागर के नाम पर सम्मेद शिखरजी जाने वाली स्पेशल ट्रेन पर दिगंबर जैन समाज ने एक डायरी तैयार की है। इसका विमोचन खुद आचार्य करेंगे। ये ट्रेन २१ जनवरी को इंदौर से रवाना होगी

दिगम्बर जैन समाज सामाजिक संसद युवा प्रकोष्ठ इंदौर के अध्यक्ष राहुल सेठी, पिंकेश टोंग्या के मुताबिक उदय नगर दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण में ये आयोजन होगा। इसमें समाज अध्यक्ष नरेंद्र वेद अध्यक्षता करेंगे।

यात्रा के संघपति कांतिकुमार जैन परिवार के साथ संयोजक सचिन कासलीवाल नांदेड़ और तेजकुमार, रितेश, अंकित सेठी परिवार का सम्मान किया जाएगा। सामाजिक संसद ने दो हजार डायरी बनाई है। इसमें शिखरजी यात्रा की पूरी जानकारी होगी।

24 टोंक के अघ्र्य, संतों के आशीर्वचन, पूर्णयाचक परिवार, सामाजिक संसद के पदाधिकारियों की जानकारी भी होगी। इस बार ये यात्रा 7 दिन की होगी जो 21 जनवरी से शुरू होकर 27 को खत्म होगी। शिखरजी में गणतंत्र दिवस मनाएंगे। ट्रेन में 1251 यात्री होंगे।

साभार : www.patrika.com


मोहन भागवत जी ने आचार्यश्री जी के किए दर्शन (07/01/2020)

इंदौर। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार दोपहर आचार्य विद्यासागरजी के दर्शन किए। संघ प्रमुख यहां उदय नगर स्थित लवकुश विद्या विहार स्कूल पहुंचे और आचार्य श्री जी से आशीर्वाद लिया।

सूत्रों के अनुसार, संघ प्रमुख और आचार्यजी के बीच हथकरघा और हिंदी भाषा के संबंध में चर्चा हुई। संघ प्रमुख के साथ सह कार्यवाहक भैयाजी जोशी ने भी आचार्य से आशीर्वाद लिया। इस दौरान संघ प्रमुख ने यहां हथकरघा से बने कपड़ों को भी देखा।

मोहन भागवत ने हथकरघा से बने कपड़े देखें
भागवत यहां आरएसएस की अखिल भारतीय बैठक में शामिल होने इंदौर आए हैं। सद्भावना ट्रस्ट के निर्मल कुमार पाटोदी एवम् संतोष सर ने ट्रस्ट की ओर से आचार्या श्री के आवहान पर आधारित मोहन जी भागवत जी को ज्ञापन दिया।

 

आचार्यश्री

23 नवंबर 1999 को आचार्यश्री का इंदौर से विहार हुआ था। तब से अब तक प्रतीक्षारत इंदौर समाज

7348
Days
16
Hours
38
Minutes
33
Seconds

2020 : विहार रूझान

मेरी भावना है कि संत शिरोमणि विद्यासागरजी महामुनिराज का विहार सतवास से यहां होना चाहिए :




5
24
1
20
17
View Result

कैलेंडर

january, 2020

No Events

hi Hindi
X
X